जागरण संवाददाता, मोगा : शहर में अगर बिना नक्शे के पांच मंजिली बिल्डिग भी खड़ी कर लो तो कोई पूछेगा नहीं, लेकिन अपने मकान का नक्शा पास कराने के लिए आवेदन कर दिया तो एक-एक साल तक निगम की फाइलों में फंस सकता है। ऑनलाइन सिस्टम के बाद नक्शा पांच अधिकारी व मुलाजिमों से होकर गुजरता है, किसी भी नक्शे पर एक बार में आपत्ति नहीं लगाते हैं, सभी बारी-बारी से आपत्तियां लगाते हैं, जिससे नक्शे के लिए आवेदन कराने वाला चक्कर ही लगाता रह जाता है, जबकि शहर में नियमों के खिलाफ खड़ी हो चुकीं पांच-पांच मंजिली बिल्डिगों के मामले में निगम के अधिकारियों ने पूरी तरह आंखे बंद कर रखी हैं।

बिल्डिगों को लेकर शहर के हर क्षेत्र में अलग अलग नियम हैं। मेन बाजार में व रेलवे रोड पर अगर कोई बेसमेंट बनाता है तो वह अधिकतम बेसमेंट को एक मंजिल मानते हुए तीन मंजिल की बिल्डिग ही बना सकता है, जबकि रेलवे रोड व मेन बाजार में बेसमेंट के साथ पांच-पांच मंजिली बिल्डिग खड़ी हो गई हैं, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है, किसके कहने पर ये बिल्डिगे खड़ी हैं।

केस.1

राजिंद्रा एस्टेट में मकान बनवाने के लिए कामिनी नामक महिला ने नौ मई 2019 को नक्शा मंजूरी के लिए नगर निगम को दिया था, कामिनी के मकान का नक्शा आठ महीने बाद भी बनकर तैयार नहीं हुआ है। उसी समय से महिला निगम ऑफिस के चक्कर लगा रही है। एक के बाद एक ऑब्जेक्शन लगाकर मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है। केस.2

बहोना चौक पर मंजीत सिंह नामक व्यक्ति को मात्र दो मरले में अपना मकान बनाना है, तीन महीने से वह नगर निगम के चक्कर लगा रहा है, लेकिन आज तक नगर निगम ने उसके मकान का नक्शा मंजूर नहीं किया। मंजीत सिंह का कहना है कि जब भी निगम जाते हैं, हर बार कोई नया ऑब्जेक्शन लगाकर उन्हें टाल दिया जाता है, एक बार में सभी ऑब्जेक्शन नहीं बताए जा रहे हैं। केस.3

आशा नागपाल का मामला सीएलयू के लिए अगस्त 2019 से लटका पड़ा है। आशा नागपाल का कहना है कि सभी डॉक्यूमेंट पूरे लगाने के बावजूद उनका सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) का केस आज तक सोल्व नहीं किया गया है। निगम के सीएलयू व नक्शे का मामला अटक जाने के बाद वे चाहकर भी अपना मकान नहीं पा रही हैं।

ये हैं नियम

नगर निगम के एटीपी दमनजीत सिंह का कहना है कि किसी भी बिल्डिग के नक्शे की मंजूरी के लिए पांच चैनलों से गुजरना होता है। हर चैनल पर मौजूद अधिकारी को नक्शा मंजूर करने के लिए सात दिन का समय मिलता है। पहले 15 दिन के अंदर अगर नक्शे के किसी भी आवेदन पर समय पर आपत्ति लगाकर रिबर्ट कर दिया गया तो समय ज्यादा लग सकता है, 15 दिन में अगर आपत्ति नहीं लगती है तो नक्शा जैसा आवेदन के साथ लगाया गया है, वही नक्शा मंजूर होगा। इस प्रक्रिया के बावजूद आठ-आठ महीने से नक्शों के आवेदन क्यों लंबित हैं, इस पर एटीपी का कहना था कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

नियमों के विरुद्ध बनी बिल्डिंगों की होगी जांच : निगम कमिश्नर

निगम कमिश्नर अनीता दर्शी का कहना है कि रेलवे रोड व मेन बाजार में अगर बिल्डिगे नियमों के खिलाफ बनी हैं तो इसे चेक कराएंगी आखिर कैसे बन गईं, इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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