सत्येन ओझा, मोगा : फर्श पर बच्चे की डिलीवरी होने के मामले में सहायक सिविल सर्जन डॉ. जसवंत सिंह की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट बनाकर हेल्थ डायरेक्टर को सौंप दी है। इस केस में उन्होंने महिला रोग विशेषज्ञ व बाल रोग विशेषज्ञ को दोषी मान उन पर कार्रवाई की सिफारिश की। रिपोर्ट में लिखा कि दोनों की लापरवाही से नवजात की हालत बिगड़ी। पहले उसे निमोनिया हुआ, बाद में पीलिया भी हो गया जिससे बच्चे को रेफर करना पड़ा। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि जब बच्चे की फर्श पर डिलीवरी हुई उस समय तापमान चार डिग्री सेल्सियस था। जबकि किसी भी सामान्य व्यक्ति के शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस (98.6 डिग्री फारेनहाइट) होता है। चार डिग्री के तापमान से नवजात पर विपरीत असर पड़ा। हालांकि शुरुआती कुछ घंटों तक नवजात सामान्य था, लेकिन बाद में उसकी हालत बिगड़ी। हालांकि उसे वार्मर रूम में रखा गया, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक ने सही केयर नहीं की। ड्यूटी बदलने के बाद जब डॉक्टर दलबीर कौर गाबा पहुंची तब उन्होंने बच्चे की केयर करना शुरू की, लेकिन तब तक हाथ से सब कुछ निकल चुका था। दोषी नंबर एक : महिला रोग विशेषज्ञ

सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में लिखा गया कि नौ अक्टूबर की अल सुबह लगातार हालत बिगड़ने पर ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने महिला रोग विशेषज्ञ को छह बार फोन किया। लेकिन उन्होंने फोन अटैंड नहीं किया। बाद में एक मुलाजिम को भेजकर सूचना पहुंचाई गई तो उन्होंने ये कहकर टाल दिया कि सुबह देखेंगे। दोषी नंबर दो : बाल रोग विशेषज्ञ

जांच रिपोर्ट के अनुसार बाल रोग विशेषज्ञ ने भी लापरवाही दिखाई। 15 घंटे तक बालक मथुरादास सिविल अस्पताल में रहा, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्चे की केयर ही नहीं की।

Posted By: Jagran

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