राज कुमार राजू.मोगा

गांव सिघावाला के किसान गुरुचरण सिंह ने दस साल पहले गेहूं व धान की पैदावार से मुक्ति पाकर नया फसली चक्र को अपनाया तो उनका जीवन चक्र ही बदल गया। उन्होंने इन दस सालों में न सिर्फ अपनी आर्थिक उन्नति की नई कहानी लिखी है,बल्कि धान की पराली को आग लगाने के भी बचे हुए हैं। इससे न सिर्फ उनका स्वास्थ्य ठीक रहने लगा है, बल्कि धरती का स्वास्थ्य भी ठीक हुआ है, जमीन पहले से ज्यादा उपजाऊ हुई है।

किसान गुरुचरण सिंह की मानें तो दस साल पहले वे गेहूं व धान से हर साल जितना कमाते थे, उससे डेढ़ गुना ज्यादा लाभ कमा रहे हैं, पहले पूरी तरह फसली लोन पर निर्भर रहते थे, अब लोन पर निर्भरता कम हुई है। दैनिक खर्चे फसलों के उत्पादन से पूरे हो जाते हैं।

किसान गुरचरण सिंह पुत्र तारा सिंह का कहना है कि वे दस सालों से अपने खेतों में मूंग, मक्की, आलू, छोले, सरसों की फसले उगा रहे हैं। फसली चक्र अपनाने से उन्हें खेत में खाद व कीटनाशक दवा का काफी कम प्रयोग करना पड़ रहा है। किसान भलाई विभाग की आत्मा स्कीम में भी वे समय-समय पर भाग लेते हैं। चड़िक में लगाया किसान सिखलाई व जागरूकता कैंप कृषि अधिकारी डा. बलविदर सिंह के दिशा-निर्देशों पर ब्लाक मोगा-एक में आते गांव चड़िक में किसान सिखलाई व जागरूकता कैंप लगाया गया। इस दौरान कृषि माहिरों ने किसानों को पराली न जलाने की अपील की।

इस मौके पर ब्लाक खेतीबाड़ी अफसर डा. गुरप्रीत सिंह ने कहा कि इस जागरूकता कैंप में भारी संख्या में गांव के किसानों ने शमूलियत की। उन्होंने किसानों से कहा कि पराली को खेत में जलाने से जहां पर्यावरण दूषित होता है, वहीं मनुष्य की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने किसानों को खेतों में ही धान की पराली को मिलाकर खेती करने को प्रेरित किया। इस मौके पर जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी मोगा की स्कीमों के बारे भी किसानों को जागरूक किया गया। इस मौके पर खेतीबाड़ी अफसर यशप्रीत कौर, अमनदीप सिंह, इशविदर कौर, दिलशाद सिंह आदि उपस्थित थे।

Edited By: Jagran