सत्येन ओझा.मोगा

भूमिहीनों को पांच-पांच मरले के प्लाट देने का सिर्फ बहाना था, असल में बधनीकलां रैली के बहाने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी जिला कांग्रेस में उठ रहे बगावती सुरों को शांत करने पहुंचे थे। यही वजह थी कि सरकारी कार्यक्रम में मोगा जिले के चारों विधायकों में से किसी को भी नहीं बुलाया गया, जिनमें तीन विधायक कांग्रेस के थे। सिर्फ कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह व सांसद मोहम्मद सदीक को ही बुलाया गया था। मंच जरूर सरकारी था, मुख्यमंत्री के बराबर बैठने वाले बगावती तेवर अख्तियार करने वाले कांग्रेस नेता थे। इनमें स्थानीय कांग्रेस नेता राजविदर कौर भागीके, शिअद से कांग्रेस में शामिल हुए भूपिदर सिंह साहोके, पूर्व एसपी मुख्त्यार सिंह, स्वर्ण सिंह आदिवाल, परमिदर सिंह डिपल के साथ ही शहर कांग्रेस में दावेदारी का झंडा बुलंद करने वाले नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन विनोद बंसल भी शामिल थे। नाराज नेताओं को महत्व देने के लिए विधायकों से बनाई दूरी

पार्टी सूत्रों का कहना है कि बधनीकलां कार्यक्रम में पार्टी के विधायकों कोअगर बुलाया जाता तो पार्टी के नाराज कार्यकर्ताओं को ज्यादा तरजीह नहीं मिल पाती। यही वजह है कि सरकारी कार्यक्रम के मुख्य मंच पर कांग्रेस के नाराज नेताओं से घिरे मुख्यमंत्री चन्नी मंच से उतरकर संबोधन के लिए जनता के बीच आ गए, ताकि वे मीडिया की रिकाडिग में अकेले बोलते दिखें, दूसरी ओर जनता के करीब रहने का मनोवैज्ञानिक लाभ भी ले सकें। अब तक जिले में मुख्यमंत्री चन्नी के कई कार्यक्रम हो चुके हैं लेकिन किसी भी कार्यक्रम में नाराज कार्यकर्ताओं को सीएम के करीब आने का मौका नहीं मिला। सिर्फ कांग्रेस के विधायक ही हर कार्यक्रम में हावी रहे। चन्नी जानते थे कि पार्टी के नाराज चल रहे कार्यकर्ताओं के आक्रोश को कम करना है तो उन्हें अपने करीब होने का अहसास कराना पड़ेगा।

साहोके के प्रति संवेदनशीलता बरती

कार्यक्रम निहाल सिंह वाला विधानसभा क्षेत्र में था। वहां पर हाल ही में शिअद को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए भूपिदर सिंह साहोके के खिलाफ स्थानीय नेताओं में काफी ज्यादा नाराजगी थी। इस स्थिति को भांपते हुए मुख्यमंत्री ने साहोके का सभी के साथ एक बार नाम लिया, उन्हें दूसरों की तुलना में ज्यादा महत्व नहीं दिया। कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पहुंचे सीएम इस बात को लेकर पूरी तरह गंभीर दिखे कि वे किसी को भी कम या ज्यादा आंक कर नया विवाद खड़ा न कर जाएं। यही वजह है कि जब संबोधन के दौरान सीएम के सामने बैठे पूर्व विधायक राजविदर कौर भागीके के समर्थकों ने उनके पक्ष में नारे लगाने शुरू किए तो सीएम ने नारे लगाने वालों को ये कहते हुए डांट दिया कि वे कांग्रेस के पक्ष में नारे लगाएं किसी के नाम के नहीं। साथ ही उन्होंने लोगों से ये भी अपील की कि सर्वे के आधार पर यहां के लोग जिसे भी सबसे ज्यादा पसंद करेंगे, उसी को पार्टी प्रत्याशी बनाया जाएगा, जो भी प्रत्याशी बने लोग उसे वोट दें, वोट कांग्रेस को दें किसी चेहरे को नहीं।

लाभार्थियों को आमंत्रित ही नहीं किया गया

जिला कांग्रेस में बड़े नेताओं में बढ़ती नाराजगी को लेकर मुख्यमंत्री इस कदर चितित थे कि दो दिन पहले ही उन्होंने इंटेलीजेंस से मिली रिपोर्ट के आधार पर बधनीकलां का कार्यक्रम रखा था,क्योंकि पार्टी में उठ रहे बगावती सुर से उन्हें नुकसान होने का अंदेशा था। दो दिन पहले ही कार्यक्रम तय होने के कारण जिला प्रशासन जिले के करीब 1300 भूमिहीन लाभार्थियों तक सूचना नहीं पहुंचा पाया। कार्यक्रम में सरकारी स्कूलों को ग्रांट का भी एलान किया जाना था, लेकिन सीएम ने कोई बात नहीं कही। सिर्फ दो लाभार्थियों को पांच-पांच मरले के प्लाट के दस्तावेज सौंपकर इसे सरकारी कार्यक्रम होने की मुहर लगा दी, ताकि रैली का खर्चा सरकार वहन कर सके, जबकि मौके पर सरकारी कार्यक्रम जैसा कुछ भी नहीं था। 52 साल के सूखे को खत्म करने की गुहार

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने निहाल सिंह वाला विधानसभा सीट पर 52 साल के सूखे को खत्म करने की गुहार हलके लोगों से लगाई। 1969 में कांग्रेस की सीट से यहां से दलीप सिंह निर्वाचित घोषित किए गए थे, उसके बाद से कभी कोई कांग्रेस प्रत्याशी आज तक यहां से नहीं जीता। साल 2007 में अजित सिंह शांत आजाद प्रत्याशी के रूप में निहाल सिंह वाला से जीते थे, निर्वाचित होने के बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे। विद्रोह के आगे हारी पार्टी

निहाल सिंह वाला क्षेत्र में पार्टी नेताओं के विद्रोह का आलम ये है कि बधनीकलां नगर पंचायत के इस साल 14 फरवरी को हुए चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी कुल 13 सीटों में से नौ सीटों पर जीते थे, तीन पर आम आदमी पार्टी, जबकि एक पर शिअद प्रत्याशी जीता था, कांग्रेस के पास प्रचंड बहुमत होते हुए भी नेताओं की आपस में तकरार के चलते पार्टी अपना नगर पंचायत अध्यक्ष नही बना सकी।

Edited By: Jagran