जागरण संवाददाता, मोगा : मोगा शहर विधानसभा सीट से कैप्टन अमरिदर सिंह खेमे से फिल्म अभिनेता सोनू सूद की बहन मालविका सूद को टिकट दिए जाने की चर्चाओं के बीच भाजपा में विरोध के स्वर उभरने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि जिला मोगा भाजपा संगठन ने किसान आंदोलन के दौर में जिस मजबूती के साथ सभी चुनौतियों को सामना करते हुए अपनी गतिविधियों को जारी रखा, ऐसे में भाजपा के ही पुराने कार्यकर्ता को टिकट दी जानी चाहिए, ऐसा नहीं होता है तो ये समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ नाइंसाफी होगी।

पार्टी के जिलाध्यक्ष विनय शर्मा ने हालांकि इस मामले में सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की लेकिन उनका कहना है कि अभी पार्टी के स्तर पर किसी भी प्रकार का फैसला नहीं हुआ है, वे लगातार चंडीगढ़ में बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। खुद विनय शर्मा के निवास के बाहर पिछले पांच महीने से किसान लगातार धरना देकर बैठे हैं। धरने को देखते हुए निवास के आसपास के लोगों ने श्री गुरुद्वारा साहिब में ले जाकर विनय शर्मा से कहा था कि या तो वे पार्टी को छोड़ दें अन्यथा वे उनका सामाजिक बहिष्कार कर देंगे। इस पर विनय शर्मा ने साफ तौर पर कहा था कि भले ही वे उनका बहिष्कार कर दें लेकिन पार्टी नहीं छोड़ेंगे। मोगा विस सीट भाजपा का हक : राकेश शर्मा

पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं प्रखर वक्ता राकेश शर्मा का कहना है कि अकाली-भाजपा गठबंधन के समय से ही भाजपा मोगा विधानसभा सीट पर अपनी दावेदारी करती आई है। हिदू बहुल क्षेत्र में ये भाजपा का हक था। लेकिन अकाली दल ने कभी भी भाजपा के साथ इंसाफ नहीं दिया न तो विधानसभा की सीट कभी दी, न ही नगर निगम में शीर्ष पद भाजपा को दिया। गठबंधन से अलग होने के बाद जिला भाजपा ने खुद को साबित कर दिखाया है। इस मौके को भाजपा से छीना नहीं जाना चाहिए, ये पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होगा, उनमें निराशा का भाव जागेगा। दो दशक बाद भाजपा को साबित करने का मिला मौका : डा. गर्ग

भाजपा नेता डा. सीमांत गर्ग ने मांग की कि करीब दो दशक के बाद भाजपा को साबित करने का मौका मिला है। चुनौती भरे दिनों में पार्टी का परफार्मेंस बेहतर रही है, चुनाव में भी मोगा की सीट भाजपा के ही कार्यकर्ताओं को मिलेगी तो हर हाल में भाजपा सीट जीतकर पार्टी को सौंपेगी। पार्टी के पास इस समय पन्ना प्रमुख तक की रणनीति तैयार करने वाले समर्पित कार्यकर्ता भी हैं, युवा जोश भी हैं। इस जोश को नेतृत्व को कमतर नहीं आंकना चाहिए।

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सत्येन ओझा

Edited By: Jagran