जागरण संवाददाता, मोगा : शहर की चक्कीवाली गली में 28 नवंबर को दो छात्र गुटों में हुए झगड़े में स्कूल से घर आ रहे छात्र के साथ मारपीट एक पुलिस अधिकारी के बेटे ने शुरू की थी, बाद में पहुंचे उसके दो साथियों ने भी छात्र के साथ मारपीट की थी। सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई लाइव घटना में पार्षद गुरप्रीत सिंह का बेटा कहीं भी नहीं दिख रहा है, लेकिन पुलिस ने पुलिस अधिकारी के बेटे को केस में शामिल करने के बजाय उसकी जगह पार्षद गुरप्रीत सिंह के बेटे को केस में नामजद कर दिया। सीसीटीवी कैमरे में मारपीट दिख रही है, छात्रा के साथ छेड़छाड़ के आरोप भी सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई घटना के अनुसार गलत हैं।

जिला शिकायत निवारण कमेटी (ग्रीवेंस कमेटी) की मीटिग में पहुंचे राज्य के शहरी आवास एवं विकास मंत्री सुख सरकारिया को घटना के सच्चाई बताने पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा के समर्थन में पहुंचे शहर भर के व्यापारी, समाजसेवी संस्थाओं के 100 से लोगों की बात पर मंत्री एसएसपी को ये निर्देश देते हुए चलते बने कि इस मामले की जांच दोबारा कराई जाये, लेकिन खुद वे अपनी आंखों से पूरी सच्चाई देखने की हिम्मत नहीं जुटा सके। मंत्री के सामने ही लोगों ने आरोप लगाया कि विधायक के इशारे पर एफआइआर में पुलिस ने पार्षद के बेटे का नाम गलत ढंग से दर्ज किया है। क्योंकि पार्षद लंबे समय से हाईवे पर केंद्र सरकार की 10 करोड़ से ज्यादा की जमीन पर कब्जा करने का विरोध कर रहे थे। पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा का आरोप था कि कब्जा विधायक के इशारे पर किया जा रहा था, इसीलिए उनके बेटे को केस में झूठा फंसाया गया है। पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा का कहना है कि मंत्री उन्हीं अधिकारियों को दोबारा जांच करने की कहकर चल दिए जिन्होंने पहले ही विधायक की कठपुतली बनकर काम किया है। मंत्री व पुलिस अधिकारियों से निराश होकर बाद में उन्होंने डिप्टी कमिश्नर संदीप हंस से इंसाफ की गुहार लगाई। डीसी ने पूरा मामला सुनने व मौके की सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद लिखित में एसएसपी को निर्देश दिए कि इस मामले की पूरे तथ्यों के आधार पर दोबारा जांच कराकर रिपोर्ट प्राथमिकता के आधार पर उन्हें सौंपी जाय।

पार्षद के बेटे के खिलाफ दर्ज मामले में शहरभर के लोगों में आक्रोश इस कदर था कि पार्षद के समर्थन में शहर के प्रमुख व्यापारी ही नहीं बल्कि शहर भर की समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। मंत्री से काफी देर तक जब मिलने नहीं दिया गया तो लोगों में आक्रोश फैल गया। बाद में डीएसपी सिटी परमजीत सिंह संधु ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया। इस मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष सचदेवा निरंजन सिंह सचदेवा, रोशन लाल, अशोक कुमार, सुनील कुमार, विजय कुमार, गगनदीप, पंकज, बब्बू अरोड़ा आदि मौजूद थे।

पुलिस पर शक के बड़े आधार

दर्ज एफआईआर में पीड़ित ने सिर्फ मारपीट का जिक्र किया है। पुलिस ने छेड़छाड़ के आरोप में केस दर्ज किया है। पुलिस ने मौके की सीसीटीवी फुटेज कब्जे में नहीं ली। पुलिस ऐसा करती को जहां पुलिस अधिकारी का बेटा सीधे तौर पर फंसता वहीं साजिश बेनकाब हो जाती। जिस छात्रा के साथ पुलिस ने एफआईआर में जिक्र किया है, उसने पुलिस को लिखित में दे दिया है कि पार्षद के बेटे का उसके साथ हुई मारपीट से कोई संबंध नहीं है, लेकिन पुलिस इस दलील को भी रिकार्ड में शामिल नहीं किया है।

Posted By: Jagran

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