जागरण संवाददाता, मोगा : द लर्निंग फील्ड ए ग्लोबल स्कूल (टीएलएफ) में आयोजित सेमिनार में स्कूल के चेयरमैन इंजी.जनेश गर्ग ने बच्चों को बताया कि स्मार्ट फोन का प्रयोग नॉलेज व उपयोग के लिए करें, उसकी आदत न डालें। फोन का अत्यधिक प्रयोग बच्चों को बीमार बनाकर उनकी प्रतिभा को उभरने से पहले ही मार देता है।

इंजी. गर्ग ने डिजिटल बोर्ड पर विभिन्न क्लिप्स व डाटा के आधार पर बच्चों को समझाया कि किस प्रकार से स्मार्ट फोन से कारण बीमार हुए बच्चों की संख्या दिनों-दिन अस्पताल में बढ़ती जा रही है, समय रहते इसके प्रति सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि तकनीक ने हमारी जिदगी काफी आसान बना दी है, उतनी ही समस्याएं भी खड़ी कर दी हैं। स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से नींद नहीं आने की समस्या पैदा होती है, जिससे चिड़चिड़ापन और झुंझलाहट होने लगती है, जो बाद में मानसिक बीमारी में बदल जाती है। स्मार्ट फोन पर उपलब्ध सामग्री दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव भी डालती है, जिससे तनाव, उदासीनता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।

स्कूल की डायरेक्टर डॉ. मुस्कान गर्ग ने बताया कि फोन की रंगीन और अधिक रोशनी वाले स्क्रीन व तकनीक हमारी आंखों की रोशनी पर भी काफी बुरा प्रभाव छोड़ती है। सिरदर्द की समस्या होती है। स्मार्टफोन की स्क्रीन पर कई तरह के कीटाणु होते हैं, जो हमें दिखाई नहीं देते, ये कीटाणु त्वचा संबंधी कई तरह की समस्याओं पैदा कर सकते हैं। स्मार्ट फोन की आदत होने पर लोग बिना फोन के बेचैनी महसूस करते हैं। यहां तक कि उन्हें अनजाना भय और घबराहट भी महसूस होता है। कई बार फोन बंद या साइलेंट पर होने के बावजूद लोगों को ये एहसास होता है कि उनका फोन बज रहा है।

Posted By: Jagran

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