सत्येन ओझा/राजकुमार राजू, मोगा : शहर की लगभग पौने दो लाख की आबादी के लिए लगे 65 ट्यूबवेल दूषित पानी की सप्लाई कर रहे हैं। 50 प्रतिशत ट्यूबवेलों पर क्लोरीन डोजर तो हैं, लेकिन बेहद खस्ताहाल, देखने में ऐसा लगता है कि डोजर के माध्यम से पानी में क्लोरीन मिलाया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दो माह में शहर विभिन्न क्षेत्रों से 19 सैंपल लिए थे, जिनमें से सभी सैंपल फेल पाए गए, रिपोर्ट में बेक्टीरियल कंटेमिनेटेड की बात कही गई है, इसका साफ मतलब है कि निगम की ओर से सप्लाई किए जा रहा पानी पीने योग्य नहीं है।

उधर अहाता बदन सिंह में नगर निगम पिछले एक महीने से दूषित पानी की फॉल्ट नहीं तलाश पाया है। इस बीच शहर के बहोना रोड क्षेत्र में पिछले दस दिनों से दूषित पानी की सप्लाई की शिकायतें मिल रही हैं। नियमानुसार प्रतिदिन शहरवासियों को रोजाना करीब 150 लीटर पानी की जरूरत होती है। शहर की इस समय कुल आबादी करीब पौने दो लाख है। इस अनुसार शहर को रोजाना घरेलू और व्यवसायिक प्रयोग के लिए 265 करोड़ लीटर रोजाना पानी की जरूरत है। निगम के 65 ट्यूबवेल शहर को करीब 250 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई तो रोजाना दे रहे हैं, लेकिन घरों में जो पानी पहुंच रहा है वह शुद्ध नहीं है। पानी के 100 प्रतिशत सेंपल फेल

स्वास्थ्य विभाग के जिला एपिडिमोलॉजिस्ट डॉ.नरेश कुमार का कहना है कि अहाता बदन सिंह में पिछले एक महीने से दूषित पानी की सप्लाई की लगातार शिकायतों के बाद एक महीने पहले पानी के 10 सेंपल लिए थे। निगम ने जब सप्लाई ठीक होने का दावा किया तो पांच सेंपल फिर लिए। वार्ड-19 में खूनी मसीत क्षेत्र में भी पानी से जब लोग बीमार होने लगे तो वहां भी लगभग 20 दिन पहले चार सैंपल लिए गए थे। सभी 19 सेंपल फेल पाए गए, सभी सेंपल की रिपोर्ट में बेक्टीरियल कंटेमिनेटेड होने की बात कही गई है। इससे पहले लाल सिंह रोड, बस्ती साधां वाली में भी पीने के पानी के सैंपल फेल आ चुके हैं। सैंपल की रिपोर्ट में कहीं भी पानी में क्लोरीन होने की पुष्टि नहीं हुई है।

शहर के 68 हजार लोगों को पानी का बिल है माफ

नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार पांच मरले के मकान के लिए पानी का बिल माफ है, इस प्रकार शहर में कुल 68 हजार लोगों को पानी का बिल माफ हैं, जबकि 22 हजार 829 लोग ही पीने के पानी की बिल भरते हैं, रिकॉर्ड में निगम के पास इतने ही पानी के कनेक्शन हैं। बाकी कनेक्शन गैर कानूनी हैं। ये है भयावह स्थिति

इंदिरा कॉलोनी में करीब तीन साल पहले दूषित पानी की सप्लाई से दो दर्जन लोग बीमार हुए थे, एक महिला की मौत हो गई थी। साल 2014 में निगाहा रोड पर बस्ती मोहन सिंह में दूषित पानी की सप्लाई से 14 लोग डायरिया के शिकार हुए थे, दो की मौत हो गई थी, वर्तमान में भी हालत वैसी ही बनती जा रही है।

डाली जा रही है क्लोरिन : निर्मल सिंह

जल सप्लाई विभाग के प्रभारी जेई निर्मल सिंह का कहना है कि इस बार क्लोरीन का टैंडर नहीं हो सका है, पहले से ही कुछ क्लोरीन बाकी थी, जो पानी की सप्लाई के साथ डाली जा रही है।

पानी में जरूरी है क्लोरिन : डॉ. नरेश

स्वास्थ्य विभाग के एपिडोमोलॉजिस्ट डॉ.नरेश कुमार का कहना है कि पानी की लीकेज व अन्य कारणों से दूषित पानी को क्लोरीनेशन से शुद्ध कर लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

Posted By: Jagran

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