संसू, सरदूलगढ़: किसानों को जहां प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ता है। वहीं सरकारों व संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण भी परेशानी झेलनी पड़ती है। इसकी ताजा मिसाल उड़त ब्रांच माइनर के टेल पर पड़ते गांव बाजेवाला, बीरेवाला व झेरियांवाली से मिलती है, जहां लोगों को पीने व सिचाई के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा है।

किसान बलविदर सिंह, तेजा सिंह, हरतेज सिंह, राम सिंह, जीवन सिंह, गुरपियार सिंह, सागर सिंह, राज सिंह, मक्खन सिंह, तेज सिंह, मलकीत सिंह, किरपाल सिंह, गुरचरन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरनैब सिंह का कहना है कि आधा दर्जन के करीब गांवों के लोग सिचाई व पीने वाले पानी के लिए उड़त ब्रांच माइनर पर निर्भर हैं। जमीनी पानी पीने व सिचाई लायक न होने के कारण लोगों को मजबूरी में उसका सहारा लेना पड़ रहा है। नहरी पानी के साधन उड़त ब्रांच माइनर की सफाई का बुरा हाल है। विभाग द्वारा इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसका खमियाजा टेलों पर पड़ने वाले गांवों के लोगों को भुगतना पड़ता है। जरूरत के समय पानी की किल्लत तो होती ही है, साथ ही माइनर की सफाई न होने के कारण बारिश के दिनों में मोघे बंद होने से माइनर खेतों में आकर टूट जाता है, जिसके चलते उनकी फसलों भी खराब होती है।

उन्होंने बताया कि संबंधित गांवों के जलघर भी इस माइनर पर ही निर्भर हैं। मगर नहरी पानी की पूरी सप्लाई न होने के कारण इन गांवों के लोगों के सामने पीने वाले पानी की सबसे बड़ी समस्या है। शुद्ध पानी न मिलने के कारण उनको जमीनी पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिस कारण कई प्रकार की बीमारियां लगने का डर रहता है। वहीं गांव के लोगों द्वारा अपने स्तर पर माइनर की सफाई की गई ताकि उनको पीने व सिचाई के लिए पानी मिलता रहे। फिर भी विभाग द्वारा उनको पूरी सप्लाई नहीं मिल रही। उनके द्वारा विभाग से मांग की गई है कि माइनर में जरूरत अनुसार नहरी पानी की सप्लाई देने के अलावा सफाई का प्रबंध किया जाए। अगर उनकी समस्या का हल न हुआ तो वह संघर्ष करने को मजबूर होंगे।

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