जासं,मौड़ मंडी: जैन स्थानक मौड़ में विराजमान संयम शिरोमणि जैन भारती सुशील कुमारी महाराज की पौत्र शिष्या साध्वी शुभिता महाराज ने सोमवार को धर्मसभा में फरमाया कि मानव जीवन परम दुर्लभ है।

उन्होंने कहा कि जहां आज जगत में कामधेनु गाय, कल्पवृक्ष, चितामणी और देव दर्शन का मिलना सुलभ नहीं है लेकिन फिर भी जप-तप से कोई व्यक्ति इसे हासिल कर सकता है। ऐसे ही मानव जीवन किसी-किसी को ही पुण्य से ही प्राप्त होता है। अनंत जन्मों के पुण्यों का संचय होता है, तब हमें ये दुर्लभ मानव जीवन मिलता है। इस मानव जीवन का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। ये ऐश-परस्ती या व्यसनों में खोने के लिए नहीं, बल्कि अगला जन्म सुधारने का अनमोल अवसर है। देवता भी इस मानव जीवन को पाने के लिए तरसते रहते हैं।

इस मौके पर साध्वी शुभिता ने धर्म की उपयोगिता का महत्व बताते हुए कहा की धर्म उत्कृष्ट मंगल रूप है। संसार के सभी मंगल अमंगल में परिवर्तित हो सकते है, लेकिन धर्म कभी अमंगल नहीं होता। संसार का हर प्राणी सुखों की खोज में इधर-उधर भाग रहा है। सुख को ढूंढने कभी वो पर्वतों पर जाता है कभी तीर्थों पर। कभी मन्दिरों में जाता है, कभी मस्जिदों पर माथा रगड़ता है, लेकिन अफसोस उसे फिर भी सुख नहीं मिलता। कई बार हताश होकर आत्महत्या तक कर लेता है। भगवान महावीर संसार के सभी जीवों को सुखी करना चाहते है, इसलिए प्रभु ने उन दुखी जीवों के लिए सुखी होने के कई उपाय बताए है। क्रोध में आदमी अंधा हो जाता है और मुंह खुल जाता है। विवेक की आंखें बंद हो जाती हैं। इसलिए टकराव को कभी आंगन में नहीं लाना चाहिए। कोई भी बात हो अंदर कमरे में करनी चाहिए। बच्चों को संस्कारी बनाना है तो पहले स्वयं संस्कारी बनें।

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