बठिंडा/मानसा, जागरण संवाददाता: लोगों की सुविधा के लिए बेशक हाईवे तो बढ़िया बना दिए गए हैं, लेकिन इन हाईवे पर चलने वाले वाहनों की स्पीड को लेकर चालकों की ओर से बरती जा रही लापरवाही के कारण सड़क हादसों में हर रोज बढ़ोतरी हो रही है। यह सड़क हादसे हर रोज किसी न किसी के घर का चिराग बुझा रहे हैं। इसके बाद भी लोग सबक नहीं लेते।

हादसों की एक सबड़े बड़ी वजह है ओवरस्पीड। अगर इसको नियंत्रित कर लिया जाए तो हादसों में काफी हद तक कमी आ सकती है। बठिंडा व मानसा दोनों जिलों में एक साल में 120 से ज्यादा लोग ओवरस्पीड के कारण हुए हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। आज के समय में लोग अपनी भागदौड़ की जिंदगी में जल्दी पहुंचने के चक्कर में वाहनों की रफ्तार इतनी बढ़ा देते हैं कि अगर अचानक उनके आगे कोई वाहन या पशु आ जाता है तो वह अपनी गाड़ी को नियंत्रित नहीं कर पाते। ऐसे में हादसा होना स्वभाविक है।

इन बातों को जानने के लिए जब दैनिक जागरण की टीम बठिंडा व मानसा की सड़कों पर उतरी तो देखा कि जहां पर फोरलेन सड़कें हैं, वहां पर तो वाहनों की गति सीमा कोई हिसाब ही नहीं है। बड़ी गाड़ियों वाले हार्न पर हाथ रख लेते हैं, जिनको वाहन चलाते समय यह भी पता नहीं लगता कि उनकी गाड़ी कितनी स्पीड पर जा रही है। यहां तक कि युवा तो गाड़ियों में ऊंची आवाज में गीत चलाकर गाड़ी को भगाते हैं, जिनको यह भी पता नहीं लगता कि उनके पीछे वाला कोई हार्न दे रहा है।

इसके अलावा यह भी देखा कि तेज गति पर वाहन चलाने वाले अपनी गाड़ियों को क्रास करते समय उनके आगे जा रही गाड़ी के बिलकुल ही साथ लगाकर निकाल लेते हैं। जब कोई वाहन चालक तेज गति पर वाहन चलाने वाले को रुकने का इशारा करता है तो वह उनसे झगड़ा करने को बढ़ते हैं। केवल फोरलेन सड़कों पर लगे हैं गति सीमा के बोर्ड बठिंडा व मानसा के हाईवे के अलावा लोकल सड़कों पर देखने को मिला कि गति सीमा के बोर्ड हाईवे पर तो लगे हैं, लेकिन वह भी केवल फोरलेन सड़कों पर। सिंगल रोड या शहर की लोकल सड़कों पर कोई भी ऐसा साइन बोर्ड नहीं लगा हुआ है। यहां तक कि स्कूलों व अस्पतालों के आगे बेशक स्कूल या अस्पताल होने का साइन बोर्ड लगा है, लेकिन वाहनों की गति कितनी रखनी है, इस संबंध में कोई भी सूचनातमक बोर्ड नहीं है।

हालांकि नियमों के अनुसार हाईवे के शुरू होने से पहले गति सीमा का बोर्ड लगाना जरूरी है कि इस रोड पर कितनी स्पीड पर वाहन चलाया जाए। इसके अलावा फिर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर भी यह बोर्ड लगे होने चाहिए, लेकिन इनकी काफी कमी दिखाई दी गई है। अगर कहीं पर यह बोर्ड लगा हुए मिल भी जाता है तो उसकी हालत ठीक नहीं होती।

नियमों के अनुसार चलें वाहन तो लगेंगे 20 मिनट ज्यादा

देखने में आया है कि ओवरस्पीड पर सबसे ज्यादा युवा वाहन चलाते हैं। कई बार लोग अपने आप को बड़ा साबित करने के लिए बोलते हैं कि वह चंडीगढ़ से बठिंडा महज सवा दो घंटे में आ गए, लेकिन वह यह नहीं बताते कि उनकी गाड़ी की स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ज्यादा रही है। अगर बठिंडा से चंडीगढ़ की बात की जाए तो 230 किलोमीटर का सफर है।

नियमों के अनुसार इस हाईवे पर वाहन की स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। अगर इस स्पीड से वाहन को चलाया जाता है कम से कम ढाई घंटे तो रोड पर ही लेगेंगे। इसके अलावा पांच टोल को क्रास करने में भी ज्यादा नहीं तो 10 मिनट का समय चाहिए। ऐसे में यह सफर पौने तीन घंटे का हो जाता है। मगर केवल 20 मिनट बचाने के लिए लोग अपने वाहनों को ओवरस्पीड चलाते हैं। 80 से ज्यादा हादसे हुए एक साल में बठिंडा में 70 के करीब लोगों की गई हादसों में जान 60 से ज्यादा हादसे हुए एक साल में मानसा में 55 के करीब लोगों की गई हादसों में जान दो जिलों में सिर्फ एक स्पीडोमीटर, कैस पता चलेगी वाहनों की गति ओवरस्पीड चलने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस के पास भी प्रर्याप्त साधन नहीं है।

अगर बठिंडा जिले की बात की जाए तो यहां पर साल 2021 में 303 लोगों के ओवरस्पीड के चालान काटे गए। वहीं तो साल 2022 में अभी तक केवल 11 लोगों के ही ओवरस्पीड के चालान काटे गए हैं। इसके अलावा मानसा में साल 2021 में 128 व साल 2022 में अभी तक केवल 18 ओवरस्पीड के चालान काटे गए हैं। इन दोनों जिलों की बात की जाए तो यहां पर 10 से ज्यादा स्टेट हाईवे या नेशनल हाईवे निकलते हैं, लेकिन पुलिस के पास वाहनों की ओवरस्पीड की जांच करने के लिए केवल एक ही स्पीडोमीटर है।

ऐसे में हर सड़क पर ओवरस्पीड की जांच करना तो मुमकिन नहीं है, जिसका नतीजा यह रहता है कि वाहन ओवरस्पीड चलने पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। ट्रैफिक इंचार्ज अमरीक सिंह का कहना है कि पुलिस द्वारा ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाती है। अगर कोई ओवरस्पीड वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो उसका चालान काटा जाता है।

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