जासं,मौड़ मंडी: स्थानीय श्री सनातन धर्म धर्मशाला में प्रवचन करते हुए जैन भारती सुशील कुमारी महाराज की शिष्या साध्वी सुनीता महाराज, साध्वी शुभिता महाराज के सान्धि्य में संवत्सरी महापर्व श्रद्धा पूर्वक मनाया गया।

महापर्व के सातवें दिन कठोर तप करते हुए श्रावक-श्राविकाओं की मेहंदी की रस्म अदा की गई। इसमें करीब 100 तपस्वियों का सम्मान किया गया। यह पर्व जैन धर्म का सबसे बड़ा पवित्र पर्व है। इस पर्व को अहिसा दिवस व क्षमा दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि जैन धर्म छोटे से छोटे सुक्ष्म जीवों की हिसा को भी पाप मानता है। इस मौके पर साध्वी शुभिता ने कहा कि एक वर्ष के पश्चात आने वाली तिथि जब साधक आत्म निरीक्षण कर मन, वचन तथा शरीर द्वारा लगे दोषों के लिए प्रायश्चित तथा पश्चाताप करता है, उसे संवत्सरी कहा जाता है। अपने से नाराज हुए लोगों से क्षमा मांगकर मैत्री के मीठे संबंध स्थापित करना तथा वैर विरोध को छोड़ना इस पर्व का उद्देश्य है। इस अवसर पर सभी तपस्या करने वालों को महाराज ने आशीर्वाद दिया व समाज द्वारा सम्मानित किया। जीवन में सुख चाहते हो तो सोच बदलो: सत्य प्रकाश जैन समाज सरदूलगढ़ द्वारा गुरुदेव श्री सुमति मुनि महाराज, ज्योतिषाचार्य गुरुदेव सत्य प्रकाश महाराज वह सेवाभावी समर्थ मुनि महाराज ठाणे 3 के सान्निध्य में संवत्सरी महापर्व तप त्याग के साथ जैन सभा पुराना बाजार में मनाया गया।

इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए ज्योतिषाचार्य सत्य प्रकाश ने कहा कि अगर जीवन में सुख पाना चाहते हो तो अपनी सोच बदलो। हम दिन-रात पैसा कमाने के चक्कर में पड़े रहते हैं। जब हम इस संसार से जाएंगे तो खाली हाथ जाएंगे। कोई भी व्यक्ति अपने साथ कुछ नहीं लेकर जाएगा। इसलिए हमें संसार के चक्कर से बचना चाहिए। हम अपने पुत्र और उनके बच्चों के लिए दिन-रात मेहनत कर कमाई कर रहे हैं लेकिन अगर हमारा पुत्र अच्छा निकला तो वह अपने आप धन कमा लेगा।

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