लुधियाना,[भूपेंदर सिंह भाटिया]। कोरोना काल ने कई रंग दिखाए हैं। औद्योगिक शहर लुधियाना के उद्योगों को इन दिनों श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना काल में अपने घरों को गई लेबर अभी तक लौटने के मूड़ में नहीं है। उद्योगों की डिमांड पूरी करने के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। आधे श्रमिकों के साथ काम कर रहे उद्योगों के लिए बचे श्रमिकों को संभाल कर रखना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। श्रमिकों की कमी के कारण दूसरे उद्योग वाले उनको बरगला कर अपने यहां ले जाते हैं। कभी भी कोई श्रमिक आकर कह देता है कि कल से मैं काम पर नहीं आ सकूंगा। जब पड़ताल की जाती है तो पता चलता है कि उसे किसी अन्य उद्योग ने ज्यादा तनख्वाह पर रख लिया है। ऐसे में श्रमिकों का भाव बढ़ गया है। उन्हें संभाल कर रखने के लिए फैक्ट्री मालिकों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

तुसीं कौण हुंदे पुलस बुलाण वाले

दवा की थोक मार्केट पिंडी स्ट्रीट में एक दुकानदार और उसका परिवार कोरोना पॉजिटिव आ गया। दुकानदार ने खुद और परिवार को होम क्वारंटाइन कर लिया। दुकान का स्टाफ मालिक की अनुपस्थिति में दुकान खोल कारोबार कर रहा था। इसकी जानकारी मार्केट के प्रधान जी को लगी तो वह पुलिस के साथ दुकान पर पहुंच गए। स्टाफ से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि मालिक तो 14 दिन से आ ही नहीं रहे। कुछ पूछना है तो उनसे पूछ लो। साथ ही स्टाफ ने मालिक को फोन लगा दिया कि पुलिस के साथ प्रधान जी पहुंचे हैं और पूछताछ कर रहे हैं। मालिक ने कहा कि उनसे मेरी बात कराओ। प्रधान जी ने जब उनसे बातचीत की तो उन्होंने तपाक से कहा, तुसीं कौण हुंदे पुलस बुलाण वाले। मैं ते मेरा परिवार पॉजिटिव होया। असीं घर विच क्वारंटाइन हां। दुकान बंद करवानी सी तां ओदां ही कैह दिंदे।

कोरोना का खौफ, मंत्री तक पहुंच

पंजाब भर में फूड सेफ्टी अफसरों के तबादले हुए। लुधियाना जैसे बड़े महानगर में अन्य जिलों से चार नए अफसर लगाए गए। एक तो शहर बड़ा और ऊपर से कोरोना वायरस का बढ़ता प्रकोप। बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव केस सामने आने के बाद छोटे जिलों से अफसर यहां आने से भी कतरा रहे हैं। 31 जुलाई को चारों फूड सेफ्टी अफसरों को ज्वाइन करना था, लेकिन इनमें से एक भी नहीं पहुंचा। विभाग में पता करने पर जानकारी मिली कि चारों अफसर लुधियाना आना ही नहीं चाहते और वह विभागीय मंत्री के पास अपनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए मंत्री के करीबियों तक अपनी बात पहुंचाने की तरकीब ढूंढ रहे हैं। उनकी पूरी कोशिश है कि किसी तरह तबादला रद करवा कर पुराने जिले में ही या फिर आसपास के किसी छोटे जिले में तैनाती करवा लें। इसे कहते हैं कोरोना का खौफ।

बिजली के चक्रव्यूह में फंसे उद्यमी

प्रदेश का उद्योग जगत पावरकॉम की नीतियों को लेकर असमंजस में है। जून से लेकर सितंबर तक सरकार को कृषि क्षेत्र को ज्यादा बिजली मुहैया करवानी होती है। ऐसे में उद्योग जगत ज्यादा बिजली न उपयोग करे, इसलिए सरकार ने चार माह का दो रुपये प्रति यूनिट अतिरिक्त बोझ डाल दिया। पावर रेगुलेटरी कमीशन ने इस संबंध में जुलाई के अंत में नोटिफिकेशन जारी किया, लेकिन पावरकॉम उद्योगों से अतिरिक्त बिजली के बढ़े रेट जून से वसूलने लगा है। उद्यमी इस बात को लेकर खासे परेशान हैं। उनका कहना है कि जून-जुलाई माह में बिजली की जो खपत कर चुके हैं और माल तक बेच चुके हैं, उस पर बिजली के नए रेट का बिल उन्हें जेब से देना पड़ेगा। नार्दन इंडिया इंडेक्शन फर्नेस एसोसिएशन के प्रधान केके गर्ग का दर्द छलक ही पड़ा। बोले, प्रदेश सरकार ने नए फरमान से उद्यमियों को चक्रव्यूह में फंसा दिया है।

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