जेएनएन, लुधियाना। शिक्षा की कोई उम्र नहीं हाेती अौर ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। शिक्षा की ललक हो तो व्‍यक्ति किसी भी उम्र में इसे हासिल कर सकता है और इसे चरितार्थ किया है यहां की एक म‍हिला ने। लुधियाना की 44 साल की रजनीबाला अपने बेटे के साथ दसवीं की परीक्षा दे रही है। रजनी का यह जज्‍बा दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित करनेवाली है।

रजनीबाला अपने बेटे के साथ यहां दसवीं की परीक्षा देने आती हैं तो उन्‍हें देखकर वहां मौजूद लोग ताज्‍जुब में रह जाती हैं। मां और बेटा परीक्षा देने साथ आते हैं और साथ ही जाती हैं। रजनीबाला का कहना है कि पति ने आगेकी परीक्षा के लिए प्रेरित किया अौर इसके बाद मैंने इसके लिए कदम बढ़ाया।

रजनीबाला सिविल अस्‍पताल में कार्य करती हैं। वह कहती हैं, मैं सिविल अस्‍पताल में वार्ड अटेंडेंट के पद पर कार्य कर रही हूं। इसी दौरान 10वीं की परीक्षा पूरी करने की जरूरत महसूस हुई। शुरू में तो बेटे के साथ स्‍कूल जाने में अटपटा लगा, लेकिन बाद में सारी हिचक दूर हो गई। अब मैं बेहद खुश हूं।

उनका कहना है, उन्‍हें लगा कि पढ़ाई के लिए कोई उम्र बड़ी नहीं होती। इसी कारण मैंने पहले छूट गई पढ़ाई फिर से शुरू करने का नि‍श्‍चय किया। मैं ड्यूटी से वापस आकर पढ़ाई करती थी। इसमें पूरे परिवार ने साथ दिया। बेटे के भी दसवीं कक्षा में रहने से काफी मदद मिली।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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