जागरण संवाददाता, पटियाला। कोयला स्टाक में कमी के संकट ने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकाम) की पिछले कई दिन से सांस फुला रखी थी, लेकिन अब मौसम में बदलाव और एग्रीकल्चर सेक्टर में बिजली डिमांड में कमी से पावरकाम को राहत मिली है। एक सप्ताह पहले जहां पावरकाम के सामने बिजली की मांग का आंकड़ा करीब 9000 मेगावाट था, वहीं आज सोमवार को यह कम होकर 6000 मेगावाट से कुछ ज्यादा तक ही रह गया है।

बीती 9 अक्टूबर को राज्य में बिजली की मांग 8788 मेगावाट रिकार्ड की गई थी। आज 18 अक्टूबर सोमवार को बिजली की यह मांग दोपहर 1:30 बजे करीब 6129 मेगावाट रिकार्ड की गई। इस तरीके से बिजली की मांग में 30 फीसद तक गिरावट आई है। कोयला स्टाक की कमी के चलते थर्मल प्लांटों को चलाने में दिक्कत झेल रहे पावरकाम के लिए यह निश्चित रूप से राहत वाली स्थिति है। इसका मुख्य कारण मौसम में बदलाव के कारण एयर कंडीशनरों के इस्तेमाल में कमी और दूसरी ओर एग्रीकल्चर सेक्टर की बिजली डिमांड में भी कमी प्रमुख तौर पर है।

सोमवार को राज्य के सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के सभी पांच थर्मल प्लांटों के कुल 15 यूनिटों में से नौ यूनिट चल नहीं पाए। स्टेट सेक्टर के तहत रोपड़ और लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट के कुल 8 यूनिटों में से एक भी यूनिट आज नहीं चलाया गया। दूसरी ओर प्राइवेट सेक्टर के राजपुरा थर्मल प्लांट के जहां दो यूनिट और तलवंडी साबो के तीन यूनिट चलाए गए। गोइंदवाल साहिब के दो यूनिटों में से एक ही यूनिट चलाया गया। इस तरह पंजाब की अपने सरकारी और प्राइवेट थर्मल प्लांटों से कुल पावर जेनरेशन 1910 मेगावाट रही।

जहां तक कोयले की उपलब्धता का मामला है तो कल रविवार को राज्य में कोयला के कुल 15 रेक पहुंचे। इसके साथ ही 42 रेक रवानगी के लिए तैयार हैं। थर्मल प्लांटों में कोयला स्टाक की उपलब्धता संबंधी पावरकाम अधिकारियों ने बताया कि तलवंडी साबो और राजपुरा में जहां ढाई-ढाई दिन लायक कोयला उपलब्ध है, वहीं गोइंदवाल साहिब प्लांट में 1 दिन से भी कम लायक कोयला मौजूद है। दूसरी ओर स्टेट सेक्टर के रोपड़ और लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में एक-एक दिन लायक कोयला बचा है।

Edited By: Kamlesh Bhatt