फरीदकोट [प्रदीप कुमार सिंह]। बढ़ती आबादी, हो रहे हादसों के साथ-साथ बीमारियों के प्रकोप से प्रदेश वासियों व पड़ोसी राज्यों के लोगों को बचाने में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की अहम भूमिका है। यूनिवर्सिटी मेडिकल कालेज, नर्सिंग कालेज आदि शिक्षण संस्थाओं से प्रतिवर्ष 35,000 से ज्यादा डाक्टर व मेडिकल स्टाफ को ट्रेंड और योग्य बना रही है। यहां से पासआउट डाक्टर्स पंजाब व देश के दूसरे हिस्सों में अपनी सेवाओं को देने के साथ ही विदेशों में भी अपना कैरियर संवार रहे हैं। वर्तमान और भविष्य में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की भूमिका तब और बढ़ जा रही है, जबकि पंजाब में कैंसर, हेपेटाइटिस सी, स्क्रीन जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। इन्हीं विषयों पर यूनिवर्सिटी के इतिहास में वाइस चांसलर की हैट्रिक लगाने वाले डाक्टर राज बहादुर ने दैनिक जागरण के साथ साक्षात्कार में विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।

प्रश्न :  प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी को ही क्यों दी सेहत विभाग की रिक्तियां भरने की जिम्मेदारी
वाइस चांसलर : गत वर्ष प्रदेश सरकार ने सेहत विभाग में लगभग चार हजार पदों को भरने की जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी को सौंपी थी, जिसे बाखूबी पूरा किया गया। निर्धारित समय में लिखित परीक्षा, साक्षात्कार के बाद मेरिट बनाकर प्रदेश सरकार को नियुक्तियां करने के लिए लिस्ट भेज दी गई। यूनिवर्सिटी के प्रति सरकार व दूसरे प्रतिष्ठानों का विश्वास पहले से और मजबूत हुआ है, जिसके फलस्वरूप ही यहां पर एम्स की कक्षाएं चलने के साथ ही पीजीआइ की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की अहम जिम्मेदारी मिली है, यहीं नहीं दो दिन पहले फिर प्रदेश सरकार ने 200 डाक्टरों की भर्ती करने की जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी को सौंपी है। इन सबके पीछे योग्य व ईमानदार लोगों की भारी भरकम टीम है, जो काम और काम करना चाहते हैं।

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प्रश्न : आने वाले वर्षों में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की पंजाब में क्या होगी भूमिका
वाइस चांसलर : 22 जुलाई 1998 को यूनिवर्सिटी ने काम करना किया शुरू था।  यूनिवर्सिटी  के अंतर्गत वर्तमान समय में प्रदेश भर में 146 मेडिकल शिक्षण संस्थान पंजाब भर में कार्यरत हैं, जिसमें लगभग 35000 विद्यार्थी यूनिवर्सिटी में  अध्ययनरत हैं। यूनिर्वसिटी पंजाब के विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ उनका उज्ज्वल भविष्य संवार रही है। आने वाले समय में यूनिवर्सिटी कुछ और कोर्स शुरू करने के साथ ही शोध परक विषयों को बढ़ाएगी, जिसका फायदा लोगों को मिलेगा। इसके अलावा आने वाले समय में पंजाब के लोगों की सेहत जरूरत को देखते हुए कई अहम कार्य किए जाने है, कैंसर के बढ़ते मामलों पर शोधपरक भी काम किए जाएंगे।


प्रश्न : मेडिकल कालेज अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं
वाइस चांसलर : बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के अंतर्गत गुरु गोविंद सिंह मेडिकल कालेज व अस्पताल चलता है।  यहां पर एमबीबीएस की सवा सौ सीटों के अलावा प्रोस्ट ग्रेजुएट में एनाटामी, फिजियोलाजी, बायोकेमिस्ट्री, पैथोलाजी, माइक्रोबायोलाजी, फार्माकोलाजी, फारेंसिक मेडिसिन, कम्युनिटी मेडिसिन, आप्थेलमोलाजी, ओटोरहिनोलिरजोलाजी, मेडिसिन, सर्जरी, पेडियाट्रिक्स, एनेस्थिसियोलाजी, आर्थोपोलाजी एमडी और एमएस करने के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण प्रदान करता है। कालेज ने क्षेत्र के रोगियों के लिए महत्वपूर्ण देखभाल सुविधा शुरू की और 2009 में 18 बेड की एक सर्जिकल और न्यूरो-सर्जिकल क्रिटिकल केयर यूनिट बनाई जिसमें 60 बेडेड क्रिटिकल केयर यूनिट है (एसआइसीयू), मेडिसिन, चेस्ट एंड टीवी (एमआइसीयू) में 19, पेडियाट्रिक्स (पीआइसीयू) में छह और नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआइसीयू) में 12, ये क्षेत्र मरीजों की महत्वपूर्ण देखभाल करने के लिए अत्याधुनिक बेड, मानिटर और वेंटिलेटर और अन्य सहायक उपकरणों से लैस हैं।

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कालेज ने न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलाजी, न्यूरोलाजी, यूरोलाजी, प्लास्टिक सर्जरी और न्यूक्लियर मेडिसिन के विभागों में सुपर-स्पेशलाइजेशन सुविधाएं शुरू की हैं। यहां पर कार्डिएक कैथ लैब की भी सुविधा है। अस्पताल में भारत ने एनआरएचएम के द्वारा मदर एंड चाइल्ड हेल्थ केयर योजना के तहत एक अलग इकाई की स्थापना के लिए 15 करोड़ रुपये आवंटित की गई हैं। ऐसी कई अन्य सुविधाएं लोगों को मिल रही है, प्रदेश का यह अपने आप में पहला अस्तपाल है जहां पर बड़ी संख्या में स्पेशलिस्ट ङ्क्षवग व 21 विभागों के द्वारा लोगों का उपचार होता है। इतने बड़े मेडिकल कालेज में यदि कहीं कुछ कमियां हैं तो उसे दूर कर लिया जाएगा।


प्रश्न : कोरोना महामारी में यूनिवर्सिटी और खुद वाइस चासंलर की क्या रही भूमिका
वाइस चांसलर : कोरोना महामारी बिल्कुल नई थी, शुरूआत के समय इससे कैसे निपटा जाए यह समझ पाना बेहद कठिन था, हम और हमारी टीम ने इस पर कई-कई घंटे काम किया है।  विशेषज्ञों की रिपोर्ट, केन्द्र व राज्य सरकार की गाइड लाइन उपरांत महामारी से लडऩे में सफलता मिली। महामारी से उपचार को लेकर गाइड लाईन भी यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार करने के साथ इसकी एक पूरी बुकलेट भी बनाई। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी को कोविड महामारी के दौरान उपचार व जांच हेतु प्रयुक्त होने वाले संसाधनों को खरीद की जिम्मेदारी जिसे भी यूनिवर्सिटी ने बाखूबी निभाया। आने वाले समय और जो भी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार द्वारा सौंपी जाएगी उसे पूरा किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने उन्हें कोविड़ महामारी से निपटने के लिए बनाई गई कमेटी का हिस्सा बनाया जिसमें उन्होंने बेहतर भूमिका अदा की।


प्रश्न : वाइस चांसलर के व्यस्त समय में से सर्जरी के लिए कितना मिल पाता है
वाइस चांसलर : मैं पहले डाक्टर हूं, उसके बाद वाइस चांसलर। स्पाइनल सर्जरी मैं अपनी शौक से करता हूं, यह सर्जरी मैं चंडीगढ़ और फरीदकोट दोनों जगह करता हूं। वाइस चांसलर के रूप में हालांकि बेहद व्यस्त कार्यक्रम होता है, परंतु ओपीडी में मरीजों को देखने के साथ ही मैं जरूरत के अनुरूप उनकी सर्जरी के लिए समय निकाल ही लेता हूं, औसतन प्रतिदिन वह एक सर्जरी करते ही है। जिस प्रकार से एक कलाकार रंगों से पेंङ्क्षटग में जान भरता है, ठीक उसी तरह उन्हें भी सर्जरी करने में पूरा आंनद आता है।  एक सर्जरी करने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है, सर्जरी करके उन्हें बेहद सुकून मिलता है।  वह अपनी सर्जरी रूपी इस कला को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिसके लिए वह अपनी अधीनस्थ डाक्टरों को ट्रेंड कर रहे है।


प्रश्न : कार्यप्रणाली व ईमानदारी पर कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं
वाइस चांसलर : हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के एक छोटे से गांव की पगडंडी से लेकर बाबा फरीद यूनिवर्सिटी का लगातार तीसरी बार वाइस चांसलर के रूप में काम करने तक एक रुपये का भी भ्रष्टाचार जीवन में नहीं किया है। वाइस चांसलर के आवास में उनके पास एक बैग व कुछ कपड़ों के अलावा उनके पास कुछ भी नहीं है।  यही हाल चंडीगढ़ में उनके कमोवेश आवास का भी है।  जो भी काम किए हैं, वह अपने स्टूडेंट्स, स्टाफ व मरीजों की भलाई के लिए किए हैं।  मेरे सख्त रूख, स्पष्टवादिता व कार्यो से कुछ लोग असंतुष्ट जरूर हो सकते है, परंतु उनका आरोप पूरी तरह से मिथ्या है।

 

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