जागरण संवाददाता, लुधियाना : कई साल के बाद आइवीएफ तकनीक से मां बनने का सपना साकार होने के बीच 35 साल की मीनाक्षी को कोरोना व डेंगू ने घेर लिया। इसके साथ ही हाइपरटेंशन, डायबिटीज व पीलिया की शिकायत भी हो गई। यहीं नहीं, मीनाक्षी के ब्लीडिग भी होने लग गई और प्लेटलेट्स भी दस हजार रह गए। उसके गर्भ में तीन बच्चे थे। ऐसे में हालत बिगड़ने पर मीनाक्षी को फोर्टिस अस्पताल में लाया जहां डाक्टरों की टीम ने उसे 14 दिन तक आइसीयू में रखा और बेहतर इलाज दिया। इसके बाद न सिर्फ मीनाक्षी की जिदगी बची, बल्कि गर्भ में पल रहे तीनों शिशु भी अब सुरक्षित हैं। इस क्रिटिकल केस को सफलतापूर्वक करने पर अस्पताल के जोनल डायरेक्टर डॉ. विश्वदीप गोयल ने कहा कि इतनी सारी समस्याओं में उलझे मरीज को बचाना चुनौतीपूर्ण काम था। उन्होंने बताया कि गायनोकोलाजिस्टव आइवीएफ स्पेशलिस्ट डा. गुरसिमरन कौर द्वारा इंटरनल मेडिसन विभाग के डायरेक्टर डा. एचएस पन्नू, क्रिटिकल केयर विभाग के एचओडी व एडिश्नल डायरेक्टर डा. विनय सिघल, चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. गौरव मित्तल व एनास्थिसिया विभाग के हेड डा. जेपी शर्मा की मदद से केस को हैंडल किया गया।

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