जेएनएन, लुधियाना। बहुचर्चित करोड़ों रुपये के कथित जालंधर-होशियारपुर फोरलेन रोड स्कैम मामले में विजिलेंस ब्यूरो पंजाब द्वारा दाखिल की गई कैंसलेशन रिपोर्ट पर सुनवाई स्थानीय अदालत ने पांंच सितंबर तक स्थगित कर दी है। अतिरिक्त सेशन जज अमर पॉल की अदालत ने सरकारी वकील को शिकायतकर्ता द्वारा दायर की गई अर्जी का जवाब देने के लिए कहा है।

शिकायतकर्ता ने अदालत में मामले के जांच अधिकारी पर आरोपितों की मदद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि केस के जांच अधिकारी डीएसपी निरंजन सिंह को आदेश दिया जाये कि वो एफआइआर दर्ज किए जाने के समय हुई जांच रिपोर्ट व एफआइआर दर्ज होने के बाद हुई इन्क्वायरी से संबंधित समस्त दस्तावेज पेश करें, ताकि सच अदालत के सामने आ सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपरोक्त मामला पूरी तरह से दस्तावेजों पर आधारित है। लेकिन जांच अधिकारी ने प्रथम जांच के दौरान लिये कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को बिल्कुल नजरअंदाज करते हुए संदिग्ध भूमिका निभाई। कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एकत्रित ही नहीं किया।

विजिलेंस की कैंसलेशन रिपोर्ट को किया था चैलेंज
बता दें कि विजिलेंस विभाग द्वारा कोर्ट में दी गई कैंसलेशन रिपोर्ट में विजिलेंस ने सभी आरोपितों को क्लीन चिट दे दी थी। मामले के आरोपित होशियारपुर के तत्कालीन एसडीएम आनंद कुमार शर्मा, होशियारपुर मार्केट कमेटी के चेयरमैन अवतार सिंह जोहल, अकाली पार्षद हरपिंदर सिंह गिल, जिला कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन सतविंदर पाल सिंह, देवी राम, जसविंदर पाल सिंह व प्रदीप प्रतीक गुप्ता समेत अन्य सभी आरोपितों को विजिलेंस ने क्लीन चिट दी थी। लेकिन जापिंदर सिंह, जगरूप सिंह, हरप्रीत सिंह, ओंकार सिंह व सुखविंदर सिंह नाम के लोगों ने विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट को झूठ बताते हुए कैंसलेशन रिपोर्ट को खारिज कर केस को जारी रखने की याचिका कोर्ट में दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं ने याचिका में कहा था कि विजिलेंस द्वारा गलत तरीके से केस को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।

यह है पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि जून 2016 में जालंधर से होशियारपुर को जाने वाली फोर लेन रोड को बनाने के लिए अधिग्रहित की गई भूमि को लेकर मामला गर्मा गया था और उस समय होशियारपुर के एसडीएम आनंद सागर शर्मा उपरोक्त भूमि को अधिग्रहण करने के लिए बनाई गई कमेटी के प्रोजैक्ट के मुखिया थे। तत्कालीन सीएम प्रकाश सिंह बादल के आदेश पर मामले की जांच शुरू की गई थी। इस संबंध में विजिलेंस ने फरवरी 2017 में मामला दर्ज किया था। कई अधिकारियों व अन्य पर मामला दर्ज होने के बाद ही अधिकतर आरोपितों ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर कर दी थी। हालांकि स्थानीय अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन दो साल बाद इसी वर्ष जून माह में विजिलेंस ने अदालतों के ग्रीष्मावकाश के दौरान गुपचुप तरीके से केस खत्म करने के लिए कैंसलेशन रिपोर्ट अतिरिक्त सेशन जज तरनतारन ङ्क्षसह ङ्क्षबद्रा की कोर्ट में दाखिल कर दी थी।

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Posted By: Vikas Kumar

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