जासं, लुधियाना

नीमा लुधियाना की वूमेन फोरम ने गर्भावस्था में हाइपोथाइरॉएडिज्म पर एक सेमिनार का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता डॉ. उषा किरण थापर ने की। सेमिनार में सीएमसी के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जुबिन जगन व दयानंद अस्पताल की नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सुमन नितिन सेठी मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुईं।

फोरम की सचिव डॉ. रेखा गोयल बजाज ने बताया जब थायराइड ग्रंथी सही कार्य नहीं करती, तो हाइपोथाइरॉएडिज्म होता है। जिस के लक्षण आम गर्भावस्था में जैसे थकावट रहने तथा वजन बढ़ जाना जैसे होते हैं। इसलिए गर्भवती स्त्री की जांच करते हुए डॉक्टर को सजग रहना पड़ता है।

डॉ. राजेश थापर एवं डॉ. रविद्र बजाज के अनुसार कभी कभी गर्भावस्था थायराइड ग्लैंड से उत्पन्न होने वाले हार्मोन में बदलाव कर देती है और अगर उसे सही समय पर इलाज ना किया जाए, तो यह माता तथा बच्चे दोनों के लिए हानिकारक हो सकती है। डॉ. जैकब ने बताया कि प्रेगनेंसी से पहले व प्रेग्नेंसी के समय थायराइड हार्मोन का लेवल नॉर्मल होना महत्वपूर्ण है। अगर स्त्री पहले थायराइड की प्रॉब्लम से ग्रसित है या परिवारिक इतिहास है तो गर्भधारण होते ही अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर हार्मोन लेवल नॉर्मल नहीं है तो गर्भाधान को कुछ देर के लिए टाल देना चाहिए। डॉक्टर रणवीर सिंह एवं डॉ. नीरज अग्रवाल ने आए हुए मेहमानों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर डॉ. बबीता अग्रवाल, डॉ. शिवाली अरोड़ा, डॉ. प्रिसी सेखों, डॉ. शशि कॉलरा, डॉ. नीरू जिदल, डॉ. गुरजीत कौर, डॉ. मीनाक्षी पंछी, डॉ. ऋतु बंसल, डॉ. नीतू धवन, डॉ. शिवानी भाटिया, डॉ. मीनाक्षी गुप्ता, डॉ. गजाला कादिर, डॉ. जसवीर एवं डॉ. वंदना विशेष तौर पर उपस्थित हुए।

Posted By: Jagran

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