अमित पासी, लुधियाना : दशकों पहले बीस से पच्चीस फीट खुदे जलाशय पहले मीठे पानी से लोगों की प्यास शांत करते थे, अब 350 से चार सौ फीट नीचे से पानी खींच रहे सबमर्सिबल पंप भी मीठे जल का अहसास नहीं करा पाते हैं। आधुनिक संसार ने इंसान को बहुत कुछ दिया है। इंसान ने विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की भी खूब की है लेकिन इस आधुनिकता के साइड इफेक्ट ही हैं कि इंसान की सबसे बड़ी जरूरत साफ पानी बड़ी मुश्किल से मिल रहा है। पहले हर गली मोहल्ले में एक से दो जलाशय हुआ करते थे जिससे हर आमजन, गरीब ,अमीर मीठे पानी से अपनी प्यास बुझाता था, अब इस समय पानी का जलस्तर इतना नीचे जा चुका है कि 400 फीट गहराई पर सबमर्सिबल लगने वाले भी साफ पानी नहीं दे पा रहे हैं। गरीब जनता तो अपने घरों में समर्सिबल करवाने का खर्चा नहीं उठा सकते, वह पानी की सरकारी सप्लाई के ऊपर ही निर्भर रहते हैं। अब अगर बिजली चली जाए या मोटर में कुछ खराबी आ जाए तो आम गरीब आदमी बाल्टी उठाकर अमीर लोगों की तरफ टकटकी लगाए रहता है। रायकोट शहर ऐतिहासिक होने के कारण यहा पर कई मशहूर जलाशय हुआ करते थे। जैसे तलवंडी गेट के पास रानी वाला जलाशय, कौड़िया मोहल्ले में बड़ा कुआं जलाशय, सेचरा मोहल्ले में, भंडारिया मोहल्ले में, बेरिया मोहल्ले में और शहर के करीब हर चौक में बड़े जलाशय हुआ करते थे। बदकिस्मती यह है कि इस समय सिर्फ एक जलाशय को छोड़कर सभी जलाशयों का नामोनिशान मिट चुका है। आजकल युवा पीढ़ी नहीं ढूंढ सकती है कि शहर में कहा जलाशय हुआ करते थे, सिर्फ पुराने बुजुर्ग ही बताते हैं कि कहा-कहा जलाशय हुआ करते थे। शहर के कई पुराने बुजुर्ग अपनी नई पीढ़ी को इसकी महत्ता बताते हुए सरकार से यह अपील करते हैं कि इन जलाशयों को पुनर्जीवन देना चाहिए।

शहर के नागरिक गुलशन कुमार का कहना है कि मीठे जल से प्यास बुझाना अब सिर्फ स्वप्न ही रह गया है। पुराने जलाशय अब खत्म हो चुके हैं। आज का इंसान सिर्फ सबमर्सिबल पंप पर ही निर्भर है।

Posted By: Jagran

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