श्री माछीवाड़ा साहिब [गुरदीप सिंह]। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कुछ दिन पहले प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को गिनाते राज्य के 11 हजार सरकारी स्कूलों में से 5500 को स्मार्ट स्कूल बनाने का दावा किया था। परंतु, सरकार के इस दावों की सच्चाई यह है कि स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए सरकार ने कोई विशेष ग्रांट नहीं दी। बल्कि, यह कार्य दानी सज्जनों के सहयोग से स्कूलों का कायाकल्प हुआ है। माछीवाड़ा ब्लॉक के कुल 60 प्राइमरी स्कूल में से 42 को स्मार्ट बनाने का दावा किया जा रहा है।

सरकार की नजरों में जो स्मार्ट स्कूल की परिभाषा है, उसके अंतर्गत बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में एक एलईडी, स्कूल की इमारत सुंदर बनाने के लिए उस पर वाल वर्क, स्कूल को मुख्य गेट, सभी विद्यार्थियों को वर्दी और उन के पास आई-कार्ड होना लाजिमी है।

25 हजार में स्कूल कैसे बनेंगे स्मार्ट

पंजाब की कांग्रेस सरकार ने तीन वर्षों के कार्यकाल दौरान पहले वर्ष माछीवाड़ा ब्लॉक के सरकारी प्राइमरी स्कूलों को एक रुपया भी ग्रांट नहीं दी। दूसरे वर्ष केवल एक हजार की प्रत्येक स्कूल को ग्रांट आई और तीसरे वर्ष ज्यादातर स्कूलों को केवल 53 हजार ग्रांट आई, जिससे अध्यापकों द्वारा स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के निर्देश दिए गए। इस 53 हजार रुपए की ग्रांट में से 5 हजार रुपए खेलों के लिए, 19 हजार रुपए बच्चों के झूले के लिए और 3 हजार रुपए लाइब्रेरी के लिए खर्च करने की हिदायत दी गई। जबकि, 25 हजार की ग्रांट से कांग्रेस सरकार ने पंजाब के स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के दावे किये जा रहे हैं।

42 प्राइमरी स्कूलों में दानी सज्जनों व शिक्षकों का सहयोग

बेशक, माछीवाड़ा ब्लॉक-एक के 60 में से 42 प्राइमरी स्कूल स्मार्ट बना दिए हैं परंतु यह स्कूल बनाने के पीछे सरकार की बजाय इलाके के दानी, प्रवासी भारतीयों और इन स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापकों का योगदान है। दानी राशि से ही स्कूलों मे लगी एलईडी व बनी इमारतें इस दान राशि से ही स्कूलों में एलईडीज और कई स्कूलों में नई इमारतें बना कर रंग-रोगन किया गया और जनरल श्रेणी के विद्यार्थियों को वर्दियां और बूट दिए तब जा कर स्मार्ट स्कूल बने। दूसरी तरफ प्रदेश सरकार बड़े-बड़े बैनर लगा स्टेजों से दावे करती नहीं थकती कि उन की तरफ से पंजाब के 5500 सरकारी स्कूल स्मार्ट स्कूल बना दिए गए हैं।

60 प्राइमरी स्कूलों में खाली हैं शिक्षकों के कई पद

सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के दावे किये जाते हैं परंतु इन स्मार्ट स्कूलों में अध्यापक ही नहीं हैं। अकले माछीवाड़ा ब्लॉक के 60 प्राइमरी स्कूलों में कुल 145 ईटीटी अध्यापकों के पद है। इनमें से 66 पद खाली पड़ीं हैं। इन स्कूलों में हेड टीचरों की 24 पदों में 17 खाली हैं। सेंटर हेड टीचर की ब्लॉक में सात पद हैं जिसमें से छह पद खाली हैं। इसी तरह ब्लॉक शिक्षा अफसर की एकमात्र पोस्ट और ब्लॉक शिक्षा दफ्तर में भी चार पद खाली हैं।

तीन स्कूलों को ताले लगे, आठ बंद होने की कगार पर

माछीवाड़ा ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में जरुरी अध्यापक और सुविधाएं न होने से इन स्कूलों में पढ़ते विद्यार्थियों को मजबूरन उनके परिजन निजी स्कूलों में पढ़ाने को विवश हैं। ब्लॉक के तीन स्कूल झड़ौदी, बुर्ज शेरपुर और रायपुर बेट को विद्यार्थियों और अध्यापकों की कमी कारण विभाग ने ताले लगा दिए। इस से पहले भी शिअद-भाजपा सरकार में भी चार स्कूल बंद हो गए थे। आठ सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ते हैं दस से भी कम बच्चे माछीवाड़ा ब्लॉक के आठ प्राइमरी स्कूल समशपुर, जस्सोवाल, दोपाना, रूड़ेवाल, धनूर, मुबारकपुर, शेरगढ़, सरबतगढ़ ऐसे हैं जहा सहूलतों की कमी कारण प्रत्येक स्कूल में 10 से कम विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं बढ़ी तो ये स्कूल भी बंद हो सकते हैं।

स्कूलों को स्मार्ट बनाने के लिए नहीं आई कोई विशेष ग्रांट : ब्लॉक शिक्षा अधिकारी

माछीवाड़ा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कुलवंत सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने के लिए कोई विशेष ग्रांट नहीं आई और जो राशि सरकार द्वारा भेजी गई है उस के साथ बाकी सहयोगियों के सहयोग से सरकारी स्कूलों को सुंदर बनाने के प्रयत्न किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी संबंधी वह कई बार पत्र के द्वारा अपने उच्च अधिकारियों को सूचित कर चुके हैं।

 

 

 

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

 

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!