जेएनएन, लुधियाना। पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल 18 फरवरी को सूबे का बजट पेश करेंगे। इस बजट को लेकर नौकरीपेशा और युवाओं को काफी उम्मीदें हैं। उनका मानना है कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले युवाओं के साथ कई वादे किए थे, अब उनको पूरा करने का वक्त है। खास कर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल होना अनिवार्य है। इसके अलावा नौकरीपेशा ने प्रोफेशनल टैक्स से मुक्ति की वकालत की है, जबकि सरकारी मुलाजिमों ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए बजट में प्रावधान करने की मांग की है।

मुलाजिमों के बकाया का हो भुगतान

शिक्षिका पूनम अरोड़ा का कहना है कि सरकारी मुलाजिमों की डीए की चार किश्तें बकाया है। उनके भुगतान के लिए बजट में प्रावधान किया जाए। केंद्र सरकार के साथ ही डीए की किश्त सूबे के मुलाजिमों को जारी करने की व्यवस्था की जाए। मुलाजिमों के बकाए का भुगतान पहल के आधार पर किया जाए।

ठेके पर रखे कर्मचारी रेगुलर किए जाएं

रिटायर्ड लेक्चरर सुरिंदर सिंह कंग का कहना है कि सरकार के विभिन्न विभागों में ठेके पर मुलाजिम रखे हुए हैं। उनको पूरा वेतन नहीं मिल पा रहा है। इससे उनमें रोष है। बजट में ऐसे प्रावधान किए जाएं कि ठेके पर रखे मुलाजिमों को रेगुलर करने की दिशा में पहल हो सके। इससे मुलाजिमों को सुकून मिल सकेगा। इसके अलावा नई भर्ती रेगुलर आधार पर ही की जाए। इसके अलावा पेंशनर्स के सारे भत्ते एवं बकाए का भुगतान करने के लिए बजट में इंतजाम किए जाएं। 

रोजगार बढ़ाने के लिए उठाए जाएं कदम

अकाउंटेंट नाज्मा चौधरी का कहना हैकि सूबे में शिक्षित युवा बेरोजगार हैं। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए बजट में ठोस इंतजाम करने होंगे। इसके लिए सूबे में बड़े स्तर पर नए निवेश की जरूरत है। दूसरे सरकारी विभागों में भी खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया की शुरू की जाए। इससे युवाओं को रोजगार मिलने में आसानी होगी। इसके अलावा शहर में ट्रैफिक, प्रदूषण की समस्या के निपटाने के लिए उपयुक्त कदम उठाए जाएं।

प्रोफेशनल टैक्स से दिलाई जाए मुक्ति

अध्यापक सुखधीर सिंह सेखों का कहना है कि आयकर रिटर्न भरने वालों से सूबा सरकार दो सौ रुपये प्रति माह के हिसाब से प्रोफेशनल टैक्स वसूल रही है। अब केंद्र सरकार ने पांच लाख तक की आय को आयकर से छूट दी है। ऐसे में सूबा सरकार को भी प्रोफेशनल टैक्स से मुक्ति देनी होगी। इसके लिए बजट में बकायदा प्रावधान किए जाएं। इस टैक्स को लेकर नौकरीपेशा वर्ग में काफी नाराजगी है। सरकार ने मुलाजिमों पर यह अतिरिक्त बोझ डाल रखा है। 

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं

पंजाब रोडवेज के कर्मचारी गुरचरण सिंह दुग्गा का कहना है कि पंजाब में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को एक जनवरी 2016 से लागू किया जाना था, लेकिन तीन साल बीत जाने के बावजूद सूबा सरकार ने इनको अभी तक लागू नहीं किया है। सरकार वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करे और इसके लिए बजट में बकायदा प्रावधान करे। इस मुद्दे को लेकर भी मुलाजिमों में नाराजगी है। इसके अलावा सूबे में करीब दो साल का डीए बकाया है। मुलाजिमों को उसका भुगतान तुरंत किया जाए। इसके लिए भी बजट में इंतजाम किया जाए।

अपराध रोकने के लिए उठाए जाएं कदम

शिक्षिका मीनाक्षी धवन का कहना है कि लुधियाना को सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत सुरक्षित बनाने का इंतजाम किया जा रहा है। बावजूद इसके यहां पर अपराध बढ़ रहा है। अपराध को रोकने के लिए बजट में पुलिस को हाईटेक करने के लिए प्रावधान किया जाए, ताकि लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके अलावा शहर के विकास कार्यो के लिए जरूरी फंड का बजट में इंतजाम किया जाए। ऐसा करके कोई भी प्रोजेक्ट पैसे की कमी के चलते लटक नहीं पाएगा। इसके अलावा युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ाने होंगे।

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