लुधियाना [राजन कैंथ]। देश के साथ-साथ अब पंजाब की जेलों में भी कोरोना वायरस का खतरा मंडराने लगा है। क्षमता से अधिक कैदी रखे जाने के कारण राज्य की जेलें ओवरलोड हो चुकी हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कोरोना महामारी के तेजी से बढऩे के कारण खचाखच भरी जेलों से कैदियों की संख्या कम करने के लिए रूपरेखा बनाई गई है।

पंजाब की विभिन्न जेलों में से 3600 सजायाफ्ता कैदियों को 90 दिन के लिए पेरोल पर छोड़े जाने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस अजय तिवारी, कार्यकारी चेयरमैन पंजाब कानूनी सेवाएं अथारिटी की अध्यक्षता में संपन्न हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इसमें डीके तिवारी ङ्क्षप्रसिपल सचिव पंजाब जेल, एडीजीपी जेल प्रवीण कुमार सिन्हा, आइजी जेल आरके अरोड़ा तथा एडिशनल मेंबर सेक्रेटरी पंजाब लीगल सर्विस अथारिटी मंदीप मित्तल भी शामिल थे।

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पंजाब की जेलों में 23,776 लोगों को रखने की क्षमता है, जबकि मौजूदा संख्या 23,808 है। इनमें सजा काट रहें 6347 कैदी तथा 17,461 विचाराधीन कैदी हैं। अनेक जमानत न मिल पाने के कारण भी सलाखों के पीछे हैं। पेरोल पर छोड़े जाने की कार्रवाई में कोई देरी न हो, इसलिए पंजाब सरकार को निर्देश जारी किए गए हैं कि वह पंजाब गुड कंडक्ट प्रिजनर्स एक्ट 1962 के तहत नोटिफिकेशन जारी करके प्रत्येक जिले में संबंधित जेल सुपङ्क्षरटेंडेंट को कैदियों को पेरोल पर छोडऩे का अधिकार दें।

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पेरोल पर छोड़ने की ऐसी होगी प्रक्रिया

हाई पावर कमेटी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पेरोल पर छोड़े जाने के लिए जो जमानती बांड भरे जाने हैं, उसके लिए प्रत्येक जिलाधीश एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाए। जो उन जमानती बांड को चेक करे। वो भी जेल में जाकर दी जाए, ताकि किसी प्रकार की कोई देरी न हो। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन लोगों ने पेरोल पर गत वर्ष जमानती बांड भरे थे। अगर उनकी जमानत देने वाले लोग इस बार भी हामी भरते हैं, तो उन्हीं जमानती बांड से काम चलाया जाए। अगर वो पुरानी जमानत देने वाले व्यक्ति हामी नहीं भरते, तो नए जमानती बांड लिए जाएं। इसके अलावा जिन लोगों को जून 2020 से लेकर मई 2021 के बीच सजा दी गई है और वह चार महीने की सजा पूरी कर चुके हैं, तो उनको भी तयशुदा गाइडलाइंस के मुताबिक पेरोल पर छोड़े जाने की उचित कार्रवाई की जाए। इसमें नियमों का पालन यकीनी हो।

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किन लोगों को नहीं मिलेगी पेरोल

दुष्कर्म आरोपितों, पोक्सो एक्ट के तहत सजा काट रहे कैदी, एसिड अटैक केस के दोषी, गैर कानूनी गतिविधियां व एक्सप्लोसिव सबस्टेंसज एक्ट में सजा पाए दोषी पेरोल के हकदार नहीं होंगे। साथ ही पेरोल पर छोड़े जाने का लाभ उन कैदियों को नहीं मिल पाएगा, जिन्होंने समय सीमा के अंदर जेलों में सरेंडर नहीं किया था। अथवा पुलिस ने उन्हें पकड़ कर जेलों में डाला। पेरोल पर जाने के बाद केस दर्ज होने वाले कैदी को भी नहीं छोड़ा जाएगा।

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जेलों की क्षमता     कुल कैदी      सजायाफ्ता कैदी      विचाराधीन कैदी

23776                23808           6347                  17461

इन तथ्यों पर भी डालें नजर

  • 1 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2021 तक एक साल में 2099 कैदी व हवालाती कोविड पाजिटिव पाए गए। जबकि जेल स्टाफ के 165 लोग भी पाजिटिव हुए।
  • 1 मार्च 2021 से 05 मई 2021 तक 65 दिनों में 1086 कैदी व हवालाती पाजिटिव आए। 17 जेल कर्मी भी संक्रमित हुए।
  • 1 मार्च से अब तक कुल 3185 कैदी व हवालाती पाजिटिव मिले, जबकि 182 जेल कर्मी पाजिटिव आए।
  • 23808 बंदियों में से 45 साल से अधिक उम्र वाले 3714 कैदियों समेत कुल 5823 कैदियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
  • 3060 जेल स्टाफ के मुलाजिमों में से 80.85 फीसद 2474 लोगों को वैक्सीन लग चुकी है।