फिरोजपुर [संजय वर्मा] फाजिल्का जिले से संबंध रखने वाली सीए युवती के साथ किसान आंदोलन के दौरान बहादुरगढ़ (झज्जर) में हुए दुर्व्यवहार को लेकर उसके पिता निराश हैं। उन्होंने किसान नेताओं से सवाल किया है कि आंदोलन में बच्चियां योगदान दे रही हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा का जिम्मा किसका है? यह तय ही नहीं किया गया।

आंदोलन में एक मेडिकल कैंप में अपनी बेटी के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत संचालक डाक्टर से भी की गई थी, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। न ही आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि कहने को तो किसान आंदोलन कैंप में महिलाओं की शिकायतों के लिए विशेष कमेटी का गठन किया है लेकिन उनकी बेटी की सुनवाई ही नहीं हुई। किसानों को ही तय करना होगा कि आखिर आंदोलन में अपनी इच्छा से सेवाएं दे रहे हमारे बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा किसका है।

उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में सभी उम्र के लोग जा रहे हैं। युवा भी शामिल हो रहे हैं, लेकिन ऐसी शिकायतों के लिए किसी की जिम्मेदारी ही तय नहीं की गई है। फाजिल्का जिले से संबंध रखने वाली युवती दुर्व्यवहार की घटना के बाद अब घर लौट चुकी है। पिता ने कहा कि वह सीए करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी कर रही थी। किसान आंदोलन शुरू हुआ तो वहां मेडिकल कैंप में बतौर वालंटियर सेवा दे रही थी। बेटी समझदार है लेकिन कैंप में उसके साथ हुए व्यवहार के बाद उसने डाक्टर को शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि अगर उन लोगों पर कार्रवाई हुई होती तो इंस्टाग्राम पर पोस्ट न डालनी पड़ती। कैंप संचालक डाक्टर ने दु‌र्व्यवहार करने वालों से पूछताछ तक नहीं की। आंदोलन में महिलाओं से दु‌र्व्यवहार की यह पहली शिकायत नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी किसान आंदोलन कैंप में कई दिनों तक सेवा करती रही है, लेकिन इस घटना के बाद वह घर लौट चुकी है। इस समय वह जरूरी कार्यो की वजह से घर पर ही है और कंपनी में अपने काम पर भी नहीं लौटी है।

Edited By: Kamlesh Bhatt