प्रदीप गर्ग, गोलेवाला (फरीदकोट)। जिले के कस्बा गोलेवाला के समीपवर्ती गांव सादावाला में किसान बिंदर सिंह ने पराली निस्तारण को लेकर नई पहल की है। वह क्षेत्र में उन किसानों के खेतों से मुफ्त में पराली इकट्ठी कर रहे हैं जो किसान खुद पराली के निस्तारण में असमर्थ हैं। बिंदर सिंह खेतों से पराली इकट्ठी कर एक जगह जमा कर रहे हैं और बाद में इसे सुखबीर एग्रो को ईंधन के लिए बेचा जाएगा। उनको इस प्रयास से गांव में एक भी किसान ने पराली को आग नहीं लगाई।

बिंदर सिंह ने बताया कि पराली निस्तारण के लिए किसानों से कोई पैसा नहीं लिया जाता। इसी कारण किसान अपने खेत में आग लगाने के बजाय पराली की गांठे बनवाकर उठवा रहे हैं। अब गोलेवाला क्षेत्र में किसी भी किसान ने अपने खेत में पराली नहीं जलाई है। गांव पक्की खुर्द के किसान बचंत सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में धान कटाई के बाद धान की पराली की गांठे बनवाकर बिंदर सिंह को दे दी हैं।

वहीं, किसान जरनैल सिंह ने कहा कि बिंदर सिंह की पहल से किसान अब पराली नहीं जला रहे हैं। किसानों को बिना किसी खर्च खेतों से पराली निकालने में मदद मिल रही है और खेत भी अगली फसल के लिए तैयार मिलता है। खास बात यह है कि बिंदर सिंह ने पराली की गांठें बनाने के लिए 85 लाख रुपये खर्च करके बेल्जियम से न्यू हालैंड की बिग बेलर मशीन और इंग्लैंड से 65 लाख रुपये का ट्रैक्टर मंगवाया है। इसके साथ ही 38 लाख रुपये लागत की रेक मशीन अमेरिका से मंगवाई है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

दिन में 80 एकड़ खेत से पराली की गांठें बनाना संभव 

बिंदर सिंह के अनुसार इस मशीनरी से एक घंटे में आठ और दिन में 80 एकड़ खेत में पराली की गांठें बनाई जा सकती है। ट्रैक्टर पर एसी कैबिन है और इसका सारा सिस्टम आटोमैटिक है। अंदर एक डिस्प्ले दी गई है जिससे पराली की गांठें बनाते समय तकनीकी जानकारी मिल जाती है और अगर कोई कमी हो तो डिस्प्ले की मदद से ही उसे दूर किया जा सकता है। स मशीन से बनने वाली पराली की गांठ डेढ़ मीटर लंबी 80 सेंटीमीटर ऊंची होती है। जिसका वजन करीब एक से डेढ़ क्विंटल तक होता है। उन्होंने बताया कि गांव सादावाला में गांठों को इकट्ठा किया जा रहा है और बाद में सुखबीर एग्रो को बेच दिया जाएगा।

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Edited By: Pankaj Dwivedi