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पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को मिला नया VC, हरविंदर धालीवाल को मिली कमान; किन्नू-केला व आंवला की नई किस्मों के हैं जनक

Published: Wed, 14 Oct 2026 08:41 PM (IST)

पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को डॉ. एचएस धालीवाल के रूप में नया वाइस चांसलर मिला है। वे बागवानी विशेषज्ञ हैं और कृषि शोध व तकनीक हस्तांतरण में अनुभवी हैं।

हरविंदर धालीवाल बने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को मिला नया VC। फाइल फोटो

हरविंदर धालीवाल बने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को मिला नया VC। फाइल फोटो

HighLights

  1. डॉ. एचएस धालीवाल पीएयू के नए वाइस चांसलर नियुक्त।

  2. बागवानी विशेषज्ञ, कृषि शोध में 31 वर्षों का अनुभव।

  3. केला, आंवला, किन्नू जैसी नई फल किस्मों के जनक।

जागरण संवाददाता, लुधियाना। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (पीएयू) को नए वाइस चांसलर (वीसी) मिल गए हैं। बुधवार को पीएयू के एग्रीकल्चर कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. एचएस धालीवाल को वीसी नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति चंडीगढ़ में हुई मीटिंग के बाद हुई।

इससे पहले डॉ. सतबीर सिंह गोसल वीसी पद पर नियुक्त थे। उनका कार्यकाल 18 अगस्त को समाप्त हो गया था। उनके सेवानिवृत्ति होने के बाद यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए रजिस्ट्रार को कार्यवाहक वाइस चांसलर नियुक्त किया गया था। डॉ. हरविंदर सिंह धालीवाल ने कृषि शिक्षा, शोध और किसानों तक नई तकनीकों को पहुंचाने के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

बागवानी एवं फल विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. धालीवाल को कृषि क्षेत्र में करीब 31 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने शिक्षण, शोध और प्रसार शिक्षा के तीनों क्षेत्रों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाई हैं।

शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां

डॉ. धालीवाल ने पीएयू की फसलों की सिफारिशों में 28 सुझाव दिए। इनमें दो नई फसलें केला और आंवला तथा किन्नू सहित विभिन्न फलों की 11 किस्में शामिल हैं। उन्होंने छह शोध परियोजनाओं का नेतृत्व किया और सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में भी काम किया। उनके प्रयासों से शिक्षकों को 16 प्रतिस्पर्धी शोध परियोजनाएं प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिनमें से सात को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मंजूरी मिली।

उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में 189 शोध प्रकाशन किए हैं। इनमें 81 शोध पत्र प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। उन्होंने पीएयू में अत्याधुनिक पत्ती विश्लेषण प्रयोगशाला स्थापित करने के साथ वायरस मुक्त पौध तैयार करने वाली नर्सरी को राष्ट्रीय स्तर की मान्यता दिलाने में भी योगदान दिया।