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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 13, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सुविधाओं के बावजूद इलाज से कतरा रहे Private Hospital, सरकारी के लिए कर रहे रेफर

By Sat PaulEdited By:
Published: Mon, 13 Apr 2020 08:50 AM (IST)Updated: Mon, 13 Apr 2020 10:42 AM (IST)

पिछले एक सप्ताह में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां प्राइवेट अस्पताल मरीजों का इलाज करने से इंकार करते ...और पढ़ें

सुविधाओं के बावजूद इलाज से कतरा रहे Private Hospital, सरकारी के लिए कर रहे रेफर
सुविधाओं के बावजूद इलाज से कतरा रहे Private Hospital, सरकारी के लिए कर रहे रेफर

लुधियाना, [आशा मेहता]। कोरोना वायरस के डर के बीच जिले के कई बड़े और छोटे प्राइवेट अस्पताल खांसी, जुकाम व बुखार के अलावा अन्य बीमारियों से पीडि़त मरीजों का इलाज करने से इंकार करने लगे हैं। वे उन्हें सरकारी अस्पताल की राह दिखा रहे हैं।

पिछले एक सप्ताह में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां प्राइवेट अस्पताल मरीजों का इलाज करने से इंकार करते हुए रेफर-रेफर खेलते रहे। समय पर इलाज नहीं होने पर दो बच्चों की मौत भी हो गई। ऐसा लगता है कि शायद धरती के भगवान कहलाने वालों के लिए मानव के जीवन का कोई मोल नहीं हैं। यह रवैया तब है, जब बड़े निजी अस्पताल कोरोना के केसों में इलाज कर सकने में सक्षम हैं।

दूसरी तरफ गंभीर मरीजों व गर्भवती महिलाओं को जरूरत पडऩे पर सरकारी अस्पताल में जाने के लिए 108 एंबुलेंस ही नहीं मिल रही है। गर्भवती महिलाओं के स्वजन 108 नंबर पर कॉल करते हैं, तो उन्हें कहा जाता है कि एंलबुेंस उपलब्ध नहीं है या फिर एंबुलेंस व्यस्त हैं।

केस-1: बच्ची को लौटा दिया, कुछ समय बाद मौत

धांधरा रोड की दस साल की बच्ची की सेहत बिगड़ गई। पिता जोगिंदर सिंह उसे मॉडल टाउन के एक बड़े निजी अस्पताल में लेकर गए। उनके अनुसार वहां ऑन ड्यूटी डॉक्टर ने बच्ची को देखा और पीडियाट्रिक वेंटिलेटर न होने की बात कहकर लौटा दिया। उन्हें सिविल अस्पताल भेज दिया। वहां पहुंचने के कुछ समय बाद ही बच्ची की मौत हो गई थी।

केस-2: रेफर-रेफर खेलते रहे तीन अस्पताल

पांच अप्रैल को दुगरी निवासी किडनी रोग से पीडि़त 35 वर्षीय महिला को सांस लेने में तकलीफ होने पर सिविल अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने कोरोना का संदेह जताकर सीएमसीएच और सीएमसीएच ने पटियाला भेज दिया। वहां भी भर्ती नहीं किया तो महिला लुधियाना के कृष्णा चैरिटेबिल अस्पताल मॉडल टाउन में दाखिल हो गई। डीसी ने जांच के आदेश दिए हैं।

केस-3: बच्ची भी तीन अस्पताल गई, अगले दिन मौत

शाम नगर में रहते दिहाड़ीदार उमेश कुमार की एक साल की बेटी जाह्नवी ने छह अप्रैल को दूध पीना छोड़ दिया। वह उलटी करने लगी। वह बेटी को लेकर फिरोजपुर रोड के निजी अस्पताल में गया। वहां से उन्हें सराभा नगर के अस्पताल और फिर आगे मॉडल टाउन के निजी अस्पताल भेज दिया। थक हारकर वह बेटी को वापस घर ले गाय। सात अप्रैल की सुबह बच्ची की मौत हो गई।

केस-4: बुलाने पर नहीं आई 108 एंंबुलेंस

9 अप्रैल को ग्यासपुरा के विजय कुमार की गर्भवती पत्नी को दर्द हो रहा था। उन्होंने 108 एंबुलेंस को फोन किया, पर नहीं आई। फिर एक एनजीओ सदस्य ने उन्हें ईएसआइ छोड़ा। वहां से डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए निजी सेंटर पर रेफर कर दिया। वह निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाकर पैदल ईएसआइ लौटे। वापस घर जाने के लिए 108 नंबर पर कॉल की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। फिर आद्या फाउंडेशन ने उनके लिए गाड़ी भेज घर पहुंचाया।

कंपनी अधिकारियों से कहा, मरीजों को उपलब्ध करवाएं एंबुलेंस

सिविल सर्जन डॉ. राजेश बग्गा ने कहा कि 108 एंबुलेंस न मिलने की शिकायतें आ रही थी। 108 एंबुलेंस की संचालक कंपनी के अधिकारियों के साथ मीटिंग कर कहा है कि गर्भवती, सड़क दुर्घटना, गंभीर बीमारी व कोरोना संदिग्ध मरीजों को प्राथमिकता पर एंबुलेंस उपलब्ध करवाएं। अगर फिर भी एंबुलेंस मिलने में परेशानी आए तो हेल्पलाइन नंबर 0161-2444193 पर शिकायत दर्ज करवाएं। 

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