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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 26, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

किसानों की फसल खरीद काे लेकर पंजाब में सियासत शुरू, चन्नी सरकार को घेरने में जुटे विपक्षी दल

By Vipin KumarEdited By:
Published: Tue, 26 Oct 2021 10:09 AM (IST)

आम आदमी पार्टी ने कहा कि 15-20 दिन हो गए हैं जब हमारे किसान को मंडियों में बैठे हैं। फसल ...और पढ़ें

फसल खरीद को लेकर सियासत गरमाने लगी है। (जागरण)
फसल खरीद को लेकर सियासत गरमाने लगी है। (जागरण)

जागरण संवाददाता लुधियाना। पंजाब में फसल खरीद को लेकर सियासत गरमाने लगी है। विपक्षी दलों ने सूबे की सरकार को फसल खरीद के मुद्दे पर भेजना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी ने फसल खरीद मैं सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाए और कहा की जननी सरकार फसल खरीदने में नाकाम है और किसान मंडियों में अपनी फसलों को लेकर परेशान हैं।

आम आदमी पार्टी जिला लुधियाना लोकसभा प्रभारी अमनदीप सिंह मोही, शहरी अध्यक्ष सुरेश गोयल, ग्रामीण अध्यक्ष हरभूपिंदर सिंह धरोर, उपाध्यक्ष शहरी डा. दीपक बंसल, निर्वाचन क्षेत्र आत्म नगर प्रभारी कुलवंत सिंह सिद्धू, निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रभारी मदन लाल बग्गा, निर्वाचन क्षेत्र पूर्व प्रभारी दलजीत सिंह भोला ग्रेवाल के नेतृत्व में लुधियाना की जिला इकाई ने शहर में गिल रोड और जालंधर बाईपास दाना मंडी का दौरा किया और किसानों का जायजा लिया।

उन्होंने कहा कि 15-20 दिन हो गए हैं जब हमारे किसान को मंडियों में बैठे हैं। फसल खरीद में चन्नी सरकार बुरी तरह विफल रही है। इस अवसर पर बोलते हुए सुरेश गोयल, कुलवंत सिंह सिद्धू, मदन लाल बग्गा और दललजीत सिंह भोला ग्रेवाल ने भी कहा कि किसान की स्थिति बहुत दयनीय है। किसानों और गुलाबी टिड्डियों ने किसानों की कपास को नष्ट कर दिया है और अब किसानों की फसल मंडियों में लुढ़क रही है क्योंकि मीडिया रिपोर्ट कर रहा था कि किसान पिछले 15-20 दिनों से अपनी फसलों के साथ मंडियों में बैठे हैं और सरकार उनकी समस्या को दूर नहीं कर रही। उन्होंने कहा न तो केंद्र सरकार की एजेंसियां ​​और न ही पंजाब सरकार की एजेंसियां ​​​​उन फसलों को खरीद रही हैं।

आप नेताओं का आरोप है कि मंडियों में किसानों को परेशान करके उन्हें कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है कई किसानों ने उन्हें इस बारे में बताया कि पहले उन्हें तंग किया जा रहा है और बाद में उनसे कम कीमत में फसल बेचने को कहा जा रहा है। किसान भी परेशानी से बचने के लिए अपनी फसलों को कम दामों में बेचने के लिए मजबूर है। उन्होंने कहा कि जिस स्तर पर इन फसलों की खरीद की जानी चाहिए, उसका कारण शायद केंद्र सरकार और पंजाब की चन्नी सरकार पिछले एक साल से किसानों से बदला ले रही है।

उन्होंने 3 के बजाय 10 अक्टूबर को किया, लेकिन लोगों के संघर्ष के दबाव में उन्हें 3 अक्टूबर को फसलों की खरीद का आदेश देना पड़ा। लेकिन अब भी नमी या किसी अन्य बहाने से किसानों की फसल मंडियों से नहीं हटाई गई है. पार्टी इन वास्तविकताओं को जानने, बाजार की मुश्किलों को जानने और किसानों को समर्थन देने और किसानों की मदद करने और सरकारों के बंद कान खोलने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएगी।