लुधियाना, [भूपेंदर सिंह भाटिया]। भले ही लोग कहें कि बिहार और उत्तर प्रदेश लौटने वाले श्रमिकों के पास पैसा नहीं है, लेकिन वह बसों में 3500 से 4000 हजार रुपये तक देकर बिहार जा रहे हैं और दलालों की खूब चांदी हो रही है। चाय की दुकान लगाने वाले सूरज कुमार के बिहार में रहते रिश्तेदार की शादी थी। सूरज ने ट्रेन के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने के अलावा वाहन पास के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन बात नहीं बनी। फिर उसने तरकीब निकाली। बिहार के एक दलाल से बात की। उसे कहा कि बच्चों को हर हाल में भेजना है। दलाल ने कहा कि 35 हजार रुपये लगेंगे और कार से उनके परिवार को बिहार ले आएगा। पास का इंतजाम कैसे होगा, तो दलाल ने कहा कि वह मुझ पर छोड़ दो। बिहार से पास बनवाकर बोलेरो गाड़ी लुधियाना पहुंची और फिर सूरज के परिवार को लेकर रवाना हो गई। इसे कहते हैं जुगाड़।

साहब की नहीं सुनी

लॉकडाउन में मिली छूट के बाद पुलिस विभाग ने शहर में काफी सख्ती कर रखी है। शाम छह बजे के बाद शहर की सड़कों पर जगह-जगह नाके लग जाते हैं और कर्फ्यू का उल्लंघन करने पर चालान काटे जाते हैं। पुलिस कप्तान के आदेश हैं कि किसी को न बख्शा जाए। थाना कोतवाली के प्रभारी राजवंत सिंह ने घंटाघर के पास नाका लगा रखा था। इसी दौरान एक कार में छह लोग जा रहे थे। पुलिस ने उस कार को रोका तो झट से चालक ने एक अन्य पुलिस अफसर का फोन लगाकर उनसे बात करने का आग्रह किया। नाके पर खड़े पुलिस अधिकारी ने बात नहीं की और सीधा चालान काट दिया। अब जिस आला अधिकारी को फोन किया, उसने चालान काटने पर थाना प्रभारी को फोन लगाकर क्लास लगा दी। थाना प्रभारी अपने शीर्ष अधिकारी के पास गया और कहा कि चालान कट्टण ते साहब नाराज हो गए।

उठक-बैठक से सबक

पिछले दो माह से लगातार कर्फ्यू रहने से लोग घरों में रहकर परेशान हो गए। खासकर वे जो रोजाना सुबह सैर करते हैं। अब कर्फ्यू हटने के बाद सुबह सात बजे से छूट क्या मिली, लोगों ने सभी नियम-कानून ताक पर रख दिए। सुबह पांच बजे ही कुछ लोग रोज गार्डन में सैर के लिए पहुंचने लगे। पीसीआर वालों ने पहले तो उन्हेंं समझाया, लेकिन फिर भी लोग पुलिस से छिपकर रोज गार्डन पहुंचते रहे। पुलिस मुलाजिमों ने सुबह-सुबह कुछ ऐसे ही लोगों को लपक लिया। पहले तो उन्हेंं बहुत फटकार लगाई और फिर उन्हें उठक-बैठक करवाकर दोबारा न निकलने की चेतावनी के साथ छोड़ा। इन्हीं में से एक शख्स सुरिंदर शर्मा ने सुबह न निकलने की तौबा कर ली और कहा कि सुबह-सुबह छत पर ही सैर कर लेंगे, लेकिन बाहर जाकर अब बेइज्जती नहीं करवानी। अब तो वह अपने बाकी साथियों को भी इसके लिए जागरूक कर रहे हैं।

पैरी हत्थ ना ला

आजकल पुलिस वाले कोरोना को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। वह जल्दी किसी को हाथ नहीं लगाते। यदि किसी को पकड़ा हो तो पहले ग्लव्स और मास्क पहनकर खुद को सुरक्षित कर लेते हैं। ताजा किस्सा घुमार मंडी का है। कफ्र्यू के दौरान पुलिस ने वहां पर नाका लगाया हुआ था। डीसीपी सुखपाल बराड़ मौके पर तैनात थे। वहां पर कफ्र्यू का उल्लंघन करने वालों से पूरी सख्ती कर रखी थी। इसी दौरान नाके से गुजर रही पुलिस ने एक कार को रुकने का इशारा किया। कार में बैठे शख्स ने मास्क नहीं पहना था। पूछने पर उसने खुद को पुलिस वाला बताया तो मुलाजिम ने कहा कि साहब से मिल लो। कार चालक ने डीसीपी को पहले सैल्यूट किया। फिर वह उनके चरण स्पर्श करने लगा तो साहब बोले, ओ पैरी हत्थ ना ला, किते कोरोना ना करवा दईं। बाद में उन्होंने उसे मास्क पहनने की सलाह दी। 

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Posted By: Sat Paul

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