जेएनएन, लुधियाना। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के वाइस चांसलर पद्मश्री डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों को एक बार फिर से चार साल के लिए एक्सटेंशन मिल गई है। उनका कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा था। जानकारी के मुताबिक बुधवार को चंडीगढ़ में हुई पीएयू बोर्ड की मीटिंग में वीसी को तीसरी बार एक्सटेंशन देने को लेकर निर्णय लिया गया। बोर्ड की मीटिंग में शामिल एक मेंबर ने इसकी पुष्टि की है।

बोर्ड मेंबर के मुताबिक सरकार की ओर से पीएयू की अचीवमेंट को देखते हुए वीसी डॉ. बलदेव सिंह को एक्सटेंशन दी गई है। बोर्ड मेंबर का कहना था कि डॉ. ढिल्लों के नेतृत्व में पीएयू ने पूर्व के वर्षो में काफी उपलब्धियां हासिल की है। वहीं दूसरी तरफ पीएयू कैंपस में भी वीसी की एक्सटेंशन को लेकर चर्चा रही। अलग-अलग विभागों में कार्यरत अधिकारी व कर्मचरियों में पूरा दिन कानाफूसी होती रही।

बोर्ड की मीटिंग में शामिल रहे पीएयू के रजिस्ट्रार डॉ. आरएस सिद्धू से जब पीएयू के वीसी को दोबारा से एक्सटेंशन दिए जाने को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। यहीं नहीं, जब पीएयू के वाइस चांसलर डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों से भी बात की गई तो उनका कहना था कि उन्हें इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं है।

गौर हो कि डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों ने 1 जुलाई वर्ष 2011 में पहली बार वाइस चांसलर का पद संभाला था। इसके बाद उन्हें दोबारा से चार साल के लिए एक जुलाई 2015 में एक्सटेंशन मिली थी। एक बार फिर से एक्सटेंशन मिलने पर उनकी हैट्रिक हो जाएगी। बता दें कि डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों से पहले प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. सुखदेव सिंह को तीन बार एक्सटेंशन मिल चुकी है।

24 जनवरी को वीसी डा. बलदेव सिंह ढिल्लों को मिला था पदमश्री

बता दें कि पीएयू के वाइस चांसलर डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों को इस साल 11 मार्च को विज्ञान व इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक पदमश्री से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रदान किया। डॉ. ढिल्लों के नेतृत्व में पीएयू को मिले कई प्रतिष्ठित सम्मान जब से डा ढिल्लों वीसी बने हैं, तब से पीएयू ने खोज, प्रसार व अकादमिक क्षेत्र में शानदार उपलिब्धयां हासिल की, जिसमें वर्ष 2017 के लिए सरदार पटेल अवार्ड मिला। इसी साल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की तरफ से भारत की राज्य खेतीबाड़ी यूनिविर्सिटी में प्रथम स्थान दिया गया। पीएयू का चुनाव इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर हुआ। आइसीएआर ने लहसुन व प्याज की खोज के लिए पीएयू को सर्वोत्तम खोज केंद्र के पुरस्कार से भी नवाजा। यहीं नहीं, डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों को भी कई प्रतिष्ठित अवार्ड मिल चुके हैें, जिसमें एशियाई मक्की कांफ्रेंस के दौरान मैज चैंपियन ऑफ द एशिया का पुरस्कार, डॉ. वीपाल मेमोरियल अवार्ड, रफी अहमद किदवई अवार्ड, ओम प्रकाश भसीन अवार्ड, लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड के साथ नवाजा जा चुका है।

गांव के छोटे से सरकारी स्कूल से पढ़कर तय किया वीसी तक का सफर

27 जून वर्ष 1947 को जन्मे डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों विश्व के नामी मक्की ब्रीडरों में से एक हैं। उनके यहां तक पहुंचने का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। तरनतारन के एक छोटे से गांव दबुर्जी के सरकारी स्कूल से इन्होंने पांचवीं तक की पढ़ाई की। वह स्कूल में बोरी लेकर जाते थे। इसके बाद इन्होंने खालसा हायर सेकेंडरी स्कूल से आठवीं की और फिर खालसा कॉलेज अमृतसर से नौवीं से बीएससी फाइनल तक पढ़ाई की, जबकि पीएयू से एमएमसी और इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीटयूट से पीएचडी करने के बाद देश विदेश की नामी यूनिविर्सटी में सेवाएं दी। वर्ष 2011 में वह पहली बार पीएयू के वीसी बने, जबकि इससे पहले वह मक्की ब्रीडर व निदेशक खोज के तौर सेवाएं दी। वह भारतीय खेती खोज परिषद के असिसटेंट डायरेक्टर जनरल भी रह चुके हैं।

मक्की की 16 किस्में विकसित की, 400 से अधिक शोध पत्र लिखे

वीसी डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों विश्व के नामी मक्की ब्रीडरों में गिने जाते हैं। एक प्लांट ब्रीडर के तौर पर वह मक्की की करीब 16 से किस्में विकसित कर चुके है, जिसमें से पारस प्रमुख है। इसके अलावा 400 से अधिक शोध पत्र और 13 पुस्तकें लिख चुके हैं।

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