लुधियाना, [भूपेंदर भाटिया/आशा मेहता]। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (पीएयू) के वाइस चांसलर डाॅ. बलदेव सिंह ढिल्लों की छवि एक कड़क वाइस चांसलर की है। उन्हें अनुशासनहीनता और समय के पाबंद न रहने वाले लोग बिलकुल पसंद नहीं हैं। समय पर काम पूरा न होने पर वह वैज्ञानिकों को भी नहीं बख्शते हैं। जब वह थापर हाल स्थित अपने दफ्तर में होते हैं तो तमाम मुलाजिम अलर्ट हो जाते हैं। मुलाजिम उन्हें दबंग वीसी कहते हैं। हालांकि इस बारे में वाइस चांसलर मुस्कुराते हुए कहते हैं 'जैसा मुझे समझा जाता है, वैसा मैं नहीं हूं। हां, मुझे अनुशासनहीनता पसंद नहीं है। जब हम ड्यूटी पर हों तो हमारा पूरा समर्पण अपने काम के प्रति होना चाहिए। अन्य इंसानों की तरह मेरा भी साफ्ट हार्ट है।'

वीसी ढिल्लों कहते हैं कि बचपन में स्कूल से भागकर फिल्में देखते थे। कई बार पिता से पिटाई भी हुई। फिल्में देखने का आज भी बहुत शौक है। पहले सिनेमा हाल में जाकर फिल्में देखते थे, अब घर पर पर देखते हैं। मीना कुमारी के बहुत बड़े फैन रहे हैं। उनकी 'दिल एक मंदिर, प्यासा, साहिब बीबी और गुलाम' जैसी फिल्में आज भी उन्हें याद हैं। 'मुगल-ए-आजम' का तो कोई जवाब ही नहीं था। राजकपूर की फिल्मों के गाने बहुत अच्छे लगते हैं। नए जमाने की 'पीके, चक्क दे इंडिया, गोल्ड' जैसी फिल्में संदेश देती हैं।

कई लोगों को यह जानकारी नहीं होगी कि वीसी डा. बलदेव सिंह ढिल्लों की प्रारंभिक शिक्षा किसी कान्वेंट स्कूल में नहीं बल्कि तरनतारन जिले के गांव दोबुर्जी के सरकारी स्कूल में हुई है। स्कूल में बैठने के लिए घर से बोरी लेकर जाते थे। बाद में तरनतारन के स्कूल दाखिला लिया फिर खालसा कालेज अमृतसर में पढऩे गए। घर से रोज दो किलोमीटर पैदल चलकर ट्रेन पकड़ते थे और अमृतसर पहुंचते थे। आगे भी कालेज पहुंचने के लिए छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। काॅलेज से लौटने के बाद पशुओं को चराते थे। छुट्टी के दिन पशुओं को नहलाना भी उनकी जिम्मेदारी थी। इस सब के बावजूद पढ़ाई में टाॅपर रहे। पीएयू से डायरेक्टर रिसर्च रिटायर्ड होने के बाद इसी यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर बने। वे पीएयू में सबसे लंबी अवधि (दस साल) से वीसी हैं।

पद्मश्री अवाॅर्ड से नवाजे गए वाइस चांसलर

पद्मश्री अवाॅर्ड से नवाजे गए वाइस चांसलर जर्मनी और मैक्सिको में भी रहे हैं। सेवानिवृत होने के बाद उनकी इच्छा अपने वतन में ही रहने की है। बेटा और बेटी आस्ट्रेलिया में रहते हैं, लेकिन वह विदेश में बसना नहीं चाहते हैं। अपनी कामयाबी के पीछे पत्नी का हाथ मानते हैं। वह बहुत व्यस्त रहते थे। देश-विदेश में कई जगह रहते थे। पत्नी ने ही बच्चों को संभाला और उनका करियर बनाया। 'आज वह मुझे संभाल रही हैं, क्योंकि मैं तो नाश्ता तक नहीं बनाता।'

धरना दे रहे मुलाजिमों से ऊपर से निकलकर पहुंच गए थे दफ्तर

एक बार पीएयू मुलाजिम यूनियन ने वीसी दफ्तर की सीढ़ियाें पर धरना लगा दिया था। वीसी ने मुलाजिमों को पहले समझाया लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद वह मुलाजिमों के ऊपर निकलकर अपने दफ्तर पहुंच गए थे। उस वक्त यह तस्वीरें काफी वायरल हुईं थी। वीसी ढिल्लों कहते हैं कि सीढि़याें पर धरना देख वह भी लौट सकते थे लेकिन ऐसा कर वह अपने कर्तव्य से न्याय नहीं कर पाते। 'मैं आफिस न पहुंचता तो मेरा स्टाफ कैसे पहुंचता। इसलिए मुझे उनके ऊपर से निकलना पड़ा था'

Edited By: Vipin Kumar