लुधियाना [भूपेंदर सिंह भाटिया]। लुधियाना सेंट्रल में मुख्य रूप से पुराने शहर का हिस्सा आता है और यहां पुराने ढर्रे पर सड़कें, इमारतें और सीवरेज व्यवस्था है। हालांकि लुधियाना को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यहां की पुरानी इमारतें और संकीर्ण बाजार इसमें बड़ी बाधा आती हैं। कई इलाकों में आज भी जलभराव से हालात बुरे हो जाते हैं। शिवजी नगर में नाले को ढकने का प्रोजेक्ट शुरू तो हुआ लेकिन पूरा नहीं हो पाया। बारिश आते ही यहां जलभराव की स्थिति हो जाती है। इतना ही नहीं, नाले में वाहन तक समा जाते हैं। धर्मपुरा इलाके में सीवरेज जाम की समस्या का हल नहीं निकल पाया। पुराना शहर और संकीर्ण बाजार होने के कारण यहां ट्रैफिक की बड़ी समस्या रहती है, जिसका कोई भी सरकार हल नहीं ढूंढ पाई है। ट्रांसपोर्ट नगर में आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं है।

आरंभ में यह क्षेत्र लुधियाना पूर्वी में आता था, लेकिन 2012 में इसे लुधियाना सेंट्रल में तब्दील किया गया। पुराने शहर में कांग्रेसी मतदाताओं का आधार है इसलिए नई सीट बनने के बाद से यहां कांग्रेस के अलावा कोई नहीं जीत पाया। दोनों बार वर्तमान विधायक सुरिंदर डाबर विजयी रहे। डावर कहते है कि नाला ढकने का काम शुरू हो चुका है और जल्द ही यह पूरा हो जाएगा। पिछले विधानसभा चुनाव में सुरिंदर डाबर ने 25 हजार से ज्यादा मतों से जीत हासिल की थी और इस बार वह इस क्षेत्र से हैटिक करने की ओर अग्रसर हैं।

पिछले चुनाव में भाजपा के गुरदेव शर्मा देबी दूसरी और लोक इंसाफ पार्टी के विपन काका सूद तीसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन इस बार ज्यादा दलों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोमांचक होने की संभावना है। सुरिंदर डाबर के मुकाबले उनके कांग्रेस के ही साथी पप्पी पराशर इस बार आम आदमी पार्टी से चुनौती दे रहे हैं। इसके अलावा अकाली दल ने पहली बार अपने उम्मीदवार के रूप में प्रितपाल सिंह को उतारा है। हाभाजपा ने अभी टिकट की घोषणा नहीं की है।

प्रचार में जुटे प्रत्याशी

चुनाव आयोग ने 22 जनवरी तक नुक्कड़ सभाओं और रैलियों पर रोक लगाई है। ऐसे में उम्मीदवार पार्टी वर्करों के साथ चुनावी रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। शीर्ष उम्मीदवार इलाके में अलग-अलग स्थानों पर छोटी-छोटी बैठकें कर कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर रहे हैं। साथ ही वह डोर-टू-डोर लोगों से मिल रहे हैं. ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच जा सके। उधर, लोगों का कहना है कि चुनाव के समय सभी पार्टियों के नेता यहां आकर आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद कोई सुध तक लेने नहीं आता। बहरहाल, लोग अभी चुनाव प्रचार की रंगत देखने का इंतजार कर रहे हैं।

Edited By: Vinay Kumar