राजेश भट्ट, लुधियाना

प्रदेश की हवा खराब होती जा रही है। लोग प्रदूषण से जूझते हुए गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इस सबके बीच ईको सिख संस्था सामने आई और पिछले साल उन्होंने पर्यावरण बचाने की मुहिम शुरू की। उन्होंने इसे गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के साथ जोड़ दिया और गुरु नानक पवित्र जंगल का नाम दिया।

प्रदेश में कई ऐसे पर्यावरण प्रेमी हैं जो गुरु नानक पवित्र जंगल लगाना चाहते हैं लेकिन उनके पास फंड नहीं हैं। अब अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने संस्था की मदद करने का एलान किया है। वे पंजाब में 100 पवित्र गुरु नानक जंगल लगाने में आर्थिक सहयोग करेंगे। संस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से संपर्क साधना शुरू कर दिया।

ईको सिख संस्था ने वर्ष 2019 के आरंभ में मियावाकी तकनीक से माइक्रो फोरेस्ट जंगल लगाने शुरू किए। इसमें पारंपरिक व फलदार पौधे लगाए। पिछले साल संस्था 125 के करीब जंगल लगा चुकी है। दिसंबर में संस्था ने अमेरिका में फंड जुटाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें भारतीय मूल के 250 लोग एकत्रित हुए। जब संस्था ने अपना लक्ष्य उनके सामने रखा तो उन्होंने 100 जंगल लगाने में सहयोग करने का भरोसा दिया। जंगल की देखभाल के लिए लोगों से करेंगे संपर्क

ईको सिख के साउथ एशिया के प्रोजेक्ट मैनेजर रवनीत सिंह ने बताया कि शहरों में भी इन जंगलों को लगाने के लिए समर्थन मिल रहा है। 160 वर्ग गज में 550 पौधे लगाए जा रहे हैं। अब एनआरआइज ने भी सहयोग देने का वाद किया है। अब उनका लक्ष्य ऐसे लोगों से भी संपर्क करना है जो जंगल लगाने के बाद उनकी फलने-फूलने तक देखभाल कर सकें। इस मुहिम के जरिए जहां पक्षियों, जीव-जंतुओं, पेड़ों की विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को बचाने का अवसर मिलेगा, वहीं युवा भी अपनी धरोहर का नजदीक से अनुभव कर सकेंगे। 100 जंगल पर खर्च होंगे एक करोड़ रुपये

रवनीत सिंह ने बताया कि एक माइक्रो जंगल तैयार करने में 80 हजार से एक लाख रुपये तक का खर्च आता है। इस तरह एनआरआइ 100 जंगल लगाने में अपना योगदान देंगे जो 80 लाख से एक करोड़ रुपये तक हो जाएगा। यह है मियावाकी तकनीक

जापान के वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. कीरा मियावाकी ने माइक्रो जंगल लगाने की तकनीक को इजाद किया। इसमें मूल प्रजातियों के पौधों को 30 गुणा घने तरीके से लगाते हैं। सामान्यत: पौधों को कम से कम दो फीट की दूरी पर लगाए जाते हैं, लेकिन इस तकनीक से चार पौधों को एक साथ लगाया जाता है जिनका आकार अलग-अलग होता है। इसमें ज्यादातर फलदार व फूल प्रजाति के पौधे लगाए जाते हैं। सिबल, अर्जुन, बेहड़ा, प्लाश, हरड़, महुआ, बेरी, पीलू, लसूड़ी, हार शिगार, मलेय बेर इत्यादि प्रमुख हैं। ये सौ फीसद आर्गेनिक, सौ फीसद बायो डाइवर्स होते हैं। इनका सक्सेस रेट 99 फीसद है। माइक्रो जंगल से ये होंगे फायदे

-भू-जलस्तर बढ़ाने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

-तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

-मिट्टी का क्षरण भी रोकेंगे।

-जीव-जंतुओं की प्रजातियों को भी संरक्षित करेंगे।

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