राजीव शर्मा, लुधियाना। पंजाब में एक्सप्रेस वे का जाल बिछाया जा रहा है। कंक्रीट के शहर खड़े हो रहे हैं, लेकिन विकास की इस तेज रफ्तार के बीच पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। हाल ही में कोविड की दूसरी लहर में आक्सीजन की कमी ने लोगों की सांसें तक उखाड़ दी। इसी को देखते हुए पर्यावरण से प्यार करने वाले लोग भी सजग हो गए हैं। इस मुद्दे पर सूबे के पर्यावरण प्रेमियों एवं स्वयं सेवी संगठनों ने आवाज भी उठाई है। उनकी कोशिशें रंग लाईं और अब अमृतसर-बठिंडा हाईवे पर इस सीजन के दौरान एक लाख पौधे लगाने की योजना है।

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि अब मोगा-लुधियाना, लुधियाना-चंडीगढ़ एवं संगरूर-बठिंडा हाईवे के आसपास पौधे लगवाए जाएंगे। इसके अलावा सूबे में पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के भाई घनैया कैंसर रोको सेवा सोसायटी एवं निरोया पंजाब मंच संत बलबीर सिंह सीचेवाल, बाबा सेवा सिंह खडूर साहिब वाले एवं अमृतसर स्थित पिंगलवाड़ा की प्रभारी बीबी इंद्रजीत कौर के साथ भी मंथन किया गया है।

माहिरों का मानना है कि पंजाब में औसतन 33 फीसद वन क्षेत्र होना चाहिए, लेकिन अभी यह 3.75 फीसद ही है। भाई घनैया कैंसर रोको सेवा सोसाइटी के प्रधान एवं निरोया पंजाब मंच के कन्वीनर गुरप्रीत सिंह चंदबाजा ने कहा कि अमृतसर-बठिंडा नेशनल हाईवे-54 पर 5-6 साल पहले एक निजी कंपनी को पौधे लगाने का ठेका दिया गया था। कंपनी ने काफी दूर-दूर और दो या तीन लेयर में ही पौधे लगाए। इसमें से सिर्फ 40 फीसद पौधे ही चल पाए। नतीजतन अब फरीदकोट एवं फिरोजपुर जिलों की सीमाओं में काफी कम पौधे रह गए हैं। इस मुद्दे को नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया के समक्ष नोटिस देकर उठाया गया। अब एनएचएआइ और वन विभाग की तरफ से इस हाईवे के आसपास 1 लाख पौधे लगाए जाएंगे।

कुछ समय बाद हाईवे के दोनों तरफ दिखेगी हरियाली

चंदबाजा ने कहा कि इसके तहत फरीदकोट जिले की हद में 38721 पौधे और फिरोजपुर जिले की हद में 50 हजार पौधे और बठिंडा जिले की हद में 5 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा बाकी पौधे अन्य जिलों की हद में लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौधे 5-6 फीट ऊंचाई के होंगे। कुछ वक्त बाद हाईवे के दोनों तरफ हरियाली नजर आएगी। चंदबाजा ने कहा कि सूबे में पर्यावरण की स्थिति को बेहतर बनाने, जमीनी पानी के स्तर में सुधार लाने के लिए संत सींचेवाल, बाबा सेवा सिंह एवं बीबी इंद्रजीत कौर से तालमेल किया गया है।

दस साल तक पेड़ काटने पर पाबंदी की मांग

एनजीओ की यह भी मांग है कि सूबे में दस साल के लिए पौधे काटने पर पाबंदी लगाई जाए।पंजाब में सिर्फ एनवायर्नमेंट फ्रेंडली इंडस्ट्री को ही लगाने की इजाजत दी जाए। चंदबाजा ने कहा कि एनजीओ का यह भी प्रयास है कि चुनाव के मद्देनजर एक लोकलहर चला कर पर्यावरण को मुद्दा बना कर राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे में इसे शामिल कराया जाए, तभी सूबे में पर्यावरण संतुलन बन पाएगा। इससे वन के रकबे में भी इजाफा होगा।

Edited By: Pankaj Dwivedi