लुधियाना, जेएनएन। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग नई दिल्ली ने राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ के फैसले को सही ठहराते हुए लुधियाना मेडिसिटी अस्पताल फिरोजपुर रोड और डा. बिक्रमजीत सिंह संधू को इलाज में कोताही बरतने पर 15 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। राष्ट्रीय आयोग के सदस्य वीके जैन ने फैसला सुनाते हुए कहा, जगराओं के युवा वकील अंशु भंडारी में हेमोपेरिटोनम की पुष्टि होने के बावजूद अस्पताल और उपचार करने वाले डाक्टर द्वारा लैपरोटामी करने का कोई प्रयास नहीं किया।

आयोग ने मेडिसिटी अस्पताल को पीड़ित परिवार को 10 लाख व डा. बिक्रमजीत सिंह संधू को पांच लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही स्पष्ट किया कि डा. संधू यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से बीमा पालिसी ले रहे थे इसलिए राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किया जाएगा। वकील अंशु भंडारी व उनकी पत्नी ¨सपल भंडारी 17 अप्रैल 2009 को सड़क दुर्घटना के शिकार हो गए थे। उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों घायलों को लुधियाना मेडिसिटी में दाखिल करवाया। वकील की हालत गंभीर थी। अस्पताल में डाक्टरों द्वारा उनकी जांच की गई।

परिवार की जिम्मेदारी पर मरीजों को छुट्टी दे दी गई। उन्हें सीएमसी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया था, लेकिन उनकी मौत हो गई। दूसरी ओर, अस्पताल और इलाज करने वाले डाक्टर का कहना था कि कोई लापरवाही नहीं हुई। वे प्रक्रिया के साथ उचित उपचार करना चाहते थे, लेकिन परिवार ने सहमति नहीं दी और मरीज को रेफर कर दिया। वहीं आयोग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज रिकार्ड तैयार नहीं किया था, जिसमें सहमति मांगी गई हो।

 

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