लुधियाना [आशा मेहता]। वेरका प्लांट के पास बुधवार को सुबह हादसे में असमय काल का ग्रास बनी छात्रा मीनू शर्मा की मौत की सूचना से समूचा गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी कैंपस सन्न रह गया।  मीनू  गडवासू के वेटरनरी साइंस कॉलेज की सेकेंड ईयर की छात्रा थी और साइंटिस्ट होम के होस्टल में रही थी।  उसके दोस्तों से लेकर लेकर हॉस्टल में रहने वाले सीनियर्स और शिक्षकों को यकीन ही नहीं हो रहा है कि पढ़ाई में होनहार व खुशदिल स्वभाव की मीनू इस दुनिया को अलविदा कह गई है।

मीनू के निधन की सूचना मिलते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुबह साढ़े ग्यारह बजे सिल्वर जुबली ब्लॉक में शोक सभा रखा। इसमें सभी ने होनहार छात्रा मीनू को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद क्लासेस सस्पेंड कर दी गई। शाम को साइंटिस्ट होम में रहने वाले एनआरआइ स्टूडेंट्स और मीनू की दोस्तों ने शाम चार बजे पीएयू में स्थित गुरुद्वारा साहिब में पाठ किया। और जिस जगह पर मीनू के साथ हादसा हुआ वहां जाकर  कैंडल मार्च निकाला।

अस्पताल में मौत से जूझ रही थी मीनू, गुरुद्वारे में दुआ मांग रहे थे दोस्त

सुबह करीब सवा नौ बजे गंभीर रूप से जख्मी मीनू का तुरंत दीपक अस्पताल में ले जाया गया। जहां पीछे पीछे से उसके दोस्त भी पहुंच एक। डॉक्टरों ने मीनू की गंभीर हाल को देखते हुए उसके दोस्तों से कि मीनू की सलामती के लिए दुआ करो। मीनू अस्पताल में मीनू जिंदगी और मौत से जूझ रही थी और उधर उसके साथी सराभा नगर स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में अरदास कर रहे थे। करीब आधे घंटे बाद खबर आई की मीनू अब इस दुनिया में नहीं रही।

वेटनरी स्टूडेंट मीनू शर्मा की एक्सीडेंट में मौत के बाद वेरका मिल्क प्लांट के बाहर कैंडल जलाकर भावभीनी श्रद्वांजलि देते साथी स्टूडेंट्स।

हादसे से दस मिनट पहले दोस्त से कहा था, सीट बचा कर रखना कॉलेज आ रही हूं

टोरोंटो निवासी और मीनू की दोस्त तारिका ने बताया कि सुबह 8:40 पर वह वेटरनरी साइंस कॉलेज में पहुंच गई थी। उस दौरान मीनू हॉस्टल में ही थी। करीब 8:50 पर मीनू का फोन आया कि हॉस्टल से निकल रही हूं, मेरी सीट बचाकर रखना। तारिका ने कहा कि मीनू और वह दोनों साथ साथ बैठती थीं।  इसलिए फोन आने पर उसने मीनू की सीट सेव कर ली। लेकिन जब वह क्लास शुरू होने पर नहीं आई, तो फोन मिलाया। फोन बंद आ रहा था। जिसके बाद क्लास में ही पता लगा कि मीनू का एक्सीडेंट हो गया है। तारिका ने कहा कि मीनू जैसी इंसान उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।

जिंदादिल और खुशमिजाज थी हमारी मीनू

साइंटिस्ट होम में रहने वाली सीनियर स्टूडेंट्स पाहुल, प्रदीप कौर व रिसर्च स्टूडेंट एलिश ने कहा कि वह दोनों मीनू की सीनियर्स हैं। लेकिन मीनू के व्यवहार की वजह से उसे अपना दोस्त मानती थी। मीनू पढ़ाई में बहुत तेज थी। पेरेंट्स के साथ काफी अटैच्ड थी। वह अकसर देखती थी कि जब भी फर्स्ट इयर की स्टूडेंट्स उससे नोट्स मांगती थीं तो वह बेझिझक उनकी मदद करती थी। उसकी सबसे बड़ी खासियत थी कि वह हमेशा खुशियां बांटती थी, हंसती और हंसाती रहती थी। उन्हें तो अब भी यकीन नहीं हो रहा कि वो हमारे बीच नहीं है।

अटेडेंट बोली: मां की तरह मानती थी

साइंटिस होम की 61 वर्षीय अटेंडेंट राधिका शर्मा को घंटों बाद भी मीनू के निधन को लेकर यकीन नहीं हो रहा था। राधिका शर्मा ने कहा कि उनके लिए मीनू बेटी की तरह थी। वो भी उन्हें मां की तरह ही मानती थी। एनआरआइ होने के बाद भी वो बेहद विनम्र स्वभाव की थी।  कई बार ड्यूटी के दौरान जब कभी बीमार हो जाती थी, तो दवा लाकर देती थी।

 

 

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Posted By: Vikas Kumar

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