मोगा, जेएनएन। पंजाब के माेगा में दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां 70 साल पुरानी बिल्डिंग की छत गिरने से मलबे में दबी मां-बेटी की मौत हो गई जबकि एक बेटी जाॅब पर होने के कारण बच गई। मकान को लेकर पारिवारिक सदस्यों में विवाद चल रहा था। विवाद के चलते लगातार खस्ताहाल होते जा रहे मकान की मरम्मत परिवार के लोग नहीं करा पा रहे थे।

मौके पर पहुंचे लोगों ने करीब एक घंटे के प्रयास के बाद मलबे में दबीं मां-बेटी को जिंदा निकाल लिया था, जिस समय उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, सांसे चल रही थीं लेकिन अस्पताल पहुंचने पर दोनों की माैत हाे गई। जानकारी के अनुसार रामगंज की गली नं.तीन निवासी चरणजीत कौर अपने पुस्तैनी मकान में पिछले काफी समय से रह रही थी, मकान को लेकर परिवार के सदस्यों में विवाद चल रहा था, मामला अदालत में था। वर्तमान में इस बिल्डिंग में 45 साल की चरणजीत कौर अपनी बड़ी बेटी सुखदीप कौर व प्लस-1 की छात्रा किरणदीप कौर के साथ रहती थी।

सुखदीप कौर किसी डा्ॅक्टर के यहां जाॅब कर रही थी, वह हादसे के दौरान घर पर नहीं थी। दोपहर करीब डेढ़ बजे जब चरणजीत कौर व किरणदीप कौर घर के अंदर काम कर रही थीं, इसी दौरान अचानक पहले छत की  मंजिल की गिर गई। घर के अंदर मौजूद मां-बेटी चरणजीत कौर व उसकी बेटी किरणदीप कौर मलबे में दब गई। सूचना मिलते ही आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर मलबे में दबी मां बेटी को निकालने का प्रयास शुरू कर दिया।

मौके पर डीएसपी सिटी बरजिंदर सिंह भुल्लर, थाना सिटी वन के प्रभारी गुरप्रीत सिंह, सिटी-2 के प्रभारी बलराज मोहन मौके पर पहुंच गए थे। विधायक डा.हरजोत कमल मथुरादास सिविल अस्पताल में पहुंच गए उन्होंने गंभीर रूप से अस्पताल में ले जाई गईं मां बेटी को मिल रही चिकित्सा सुविधा का पता किया। मां-बेटी की हालत गंभीर देख इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद डा.निधि गुप्ता ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया, लेकिन उनकी माैत हाे गई। उन्हें मलबे से बाहर निकालने में समाजसेवी अर्शदीप मोनू वाहिद, साजन, प्रीत, सोनू अरोड़ा, सागर तारिक व अन्य लोगों ने उन्हें मलबे से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

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