लुधियाना, [दिलबाग दानिश]। चीन में फैले कोरोना वायरस का असर अब पंजाब की सबसे बड़ी दवा मंडी पिंडी स्ट्रीट पर भी दिखने लगा है। चीन से दवाइयों का रॉ-मटीरियल आने के बाद उसे हिमाचल के बद्दी में तैयार किया जाता था, लेकिन इस समय चीन से रॉ-मटीरियल आना बंद हो गया है। दूसरी ओर विदेशों में दवा निर्यात करने वाले दिल्ली के व्यापारियों ने भी इस समय यहां का रुख किया है, जिससे पैरासिटामॉल जैसे सॉल्ट, एंटी एलर्जी दवाइयां और मास्क के होलसेल रेट में दो से तीन गुणा तक की बढ़ोतरी हो गई है।

चीन में दवाओं और मास्क का टोटा पड़ गया है। पहले दिल्ली से इसका निर्यात किया जा रहा था। अचानक मांग बढऩे से दिल्ली के व्यापारियों ने लुधियाना का रुख किया है। यहां के व्यापारियों की ओर से उन्हें एक रुपये का बिकने वाला डिस्पोजेबल मास्क दो से तीन रुपये और 13 रुपये का बिकने वाला एन 95 मास्क 40 से 55 रुपये में दिया जा रहा है। इसी तरह से एंटी एलर्जी की जेनेरिक और जनरल दवाइयों के रेट भी धीरे-धीरे बढऩे लगे हैं। देश के साथ-साथ प्रदेश में भी बड़ी संख्या में मास्क चीन से ही निर्यात होता था।

दवाइयों के कई सॉल्ट का रॉ-मटीरियल भी वहीं से आयात होता था। वहां पर इसकी प्रोडक्शन लगभग बंद हो गई है और मास्क और अन्य सामान को वहीं पर यूज किया जा रहा है। अगर हालात इसी तरह रहे तो प्रदेश में दवाइयों के रेट में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

दवा मार्केट पर भी पड़ेगा असर

अगर चीन में हालात ऐसे ही रहे तो इसका सीधा असर प्रदेश की दवा मार्केट पर पड़ेगा। इसका कारण वहां से आने वाले रॉ-मटीरियल का बंद होना और यहां से दवाइयों का निर्यात होना। बद्दी में चल रही दवा की फैक्ट्रियों में भी प्रोडक्शन उतनी नहीं है कि वह विदेश में सप्लाई कर सके।

सीधा चीन से कारोबार नहीं करती पिंडी स्ट्रीट

होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन लुुधियाना के अध्यक्ष अशोक डाबर लवली का कहना है कि चीन से सीधा कारोबार नहीं होता है। दिल्ली के व्यापारियों के जरिये यहां पर चीन से बनी मशीनें और दवा का रॉ मटीरियल आता है। पिंडी स्ट्रीट के कारोबार पर फिलहाल बड़ा असर नहीं है। दिल्ली के व्यापारियों ने यहां से मास्क और दवाइयां लेनी शुरू की है, इसलिए रेट बढ़े हैं। पिंडी स्ट्रीट के व्यापारियों के पास मास्क का स्टॉक बेहद कम हो गया है।

चीन में मशीनें बननी नहीं शुरू हुई तो दिखेगा मार्केट पर असर

होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन के फाइनांस सचिव निशांत अरोड़ा का कहना है कि चीन में बनने वाली दवाओं के रॉ मटीरियल के साथ-साथ हार्ट बीट चेक करने, शुगर चेक करने और दूसरी कई बीमारियों को चेक करने की मशीनें चीन में ही बनती हैं अगर वहां हालात सही नहीं हुए और मशीनें बनाने का काम शुरू नहीं हुआ तो इसका असर भी मार्केट पर पड़ेगा। इसका असर आने वाले दो या तीन माह में दवा मार्केट पर दिखने लगेगा।

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Posted By: Sat Paul

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