गार्डिंयंस ऑफ गवर्नेंस के डिस्ट्रिक हेड एचएस काहलों का कहना है कि बाहर के क्राइम को खत्म करने से पहले अपने अंदर के राक्षस को मारना होगा। लोगों को पुलिस की मदद से पहले अपनी मदद खुद करनी होगी। इसलिए लोगों को अवेयर होना बहुत जरूरी है।

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1944 में जन्मे एचएस काहलों ने 1961 में आर्मी की ट्रेनिंग शुरू की और 1965 में आर्मी ज्वाइन कर ली। इसके बाद सन 1971 में पाकिस्तान के साथ हुई लड़ाई में उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया। अब काहलों सरकार द्वारा शुरू की गार्डियंस आफ गवर्नेंस (जीओजी) के डिस्ट्रिक्ट हैड हैं, ये संस्था सरकार द्वारा जारी स्कीमों के लिए आने वाली ग्रांट पर नजर रखती है।  

काहलों कहते है पुलिस के पास लेटेस्ट संसाधन है। लेकिन कई बार हाई-प्रोफाइल मामलों में पुलिस इनका इस्तेमाल नहीं करती है । इन्हें संभाल कर रखने की बजाए पुलिस को चाहिए कि वो इन संसाधनों का इस्तेमाल करे। क्योंकि विभाग द्वारा ये संसाधन को शहर क्राइम फ्री बनाने के लिए दिए है, जिसका इस्तेमाल होना चाहिए। अगर आधुनिक उपकरणों के होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं होगा तो इनका फायदा क्या।

नियमों का पालना जरूरी

उनका कहना है कि नियमों की पालना हर शख्स के लिए जरूरी है और ये सबके लिए एक समान हैंं। हेल्मेट को जरूरी किया गया है, जिसका कारण लोगों जो सुरक्षित रखना है। लेकिन लोग इसे समझने को तैयार नहीं है, यही कारण है कि आए दिन सड़क हादसों में दो पहिया वाहन चालकों की मौतें ज्यादा हो रही हैं। इसी तरह से सीट बैल्ट चौपहिया वाहन चालकों के लिए लाजिमी है।

महिलाओं के लिए रात को सेफ व्हीकल
उनका कहना है कि महिलाओं के साथ रात के समय कई मामले रेप और छीना-झपटी जैसी वारदातें होती हैं, ऐसे में दिल्ली की तरह रात को पुलिस मुलाजिमों को रेलवे स्टेशन या बस अड्डे के बाहर खड़े होना चाहिए। जोकि महिलाओं को टैक्सी या रिक्शा करवा कर दें। ताकि महिला को लगे वो सेफ हैं और ड्राइवर के मन में भी पुलिस का डर हो। जिसके बाद वो क्राइम करने का सोच ही नहीं सकता। लेकिन हो सके तो महिलाओं को रात की ड्राइविंग और आने-जाने से परहेज ही करना चाहिए।

असलाह लाइसेंस पर लगे रोक
काहलों कहते हैं कि इन दिनों असलाह खरीदना और इसका लाइसेंस लेना आम बात हो गई। जोकि क्राइम ग्राफ बढऩे का सबसे अहम कारण है। सरकार को असलाह लाइसेंस पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा देनी चाहिए। हां, अगर किसी की जान को खतरा है तो उसे भी सभी नियमों का पालन करते हुए लाइसेंस देने चाहिए। आजकल सिर्फ टशन और हुल्लड़बाजी के लिए असलाह का इस्तेमाल हो रहा है।

पुलिस समझे अपनी ड्यूटी
अगर शहर को क्राइम फ्री बनाना है तो पुलिस को भी अपनी ड्यूटी समझनी होगी। अकसर लोगों की शिकायत रहती है कि रात के समय पुलिस मुलाजिमों ने शराब पी रखी है, तो ये गलत है। अगर पुलिस सही ढंग से नाके और चेकिंग शुरू कर दे तो किसी भी क्राइम पर घटना घटने से पहले ही ब्रेक लग जाए। काहलों कहते हैं कि पुलिस को फ्री हैंड कर काम करवाना चाहिए, न कि उन्हें वीआईपी लोगों के साथ सुरक्षा के तौर पर लगाना चाहिए। सभी वीआईपी से सुरक्षा वापस लेकर लोगों की सुरक्षा में लगानी चाहिए, इससे शहर क्राइम मुक्त होगा।

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By Krishan Kumar