डॉ. मुकेश अरोड़ा कहते हैं कि सरकार को सरकारी स्‍कूलों के लिए बजट बढ़ाने की जरूरत है। ताकि समाज के अंतिम व्‍यक्ति को भी बेहतरीन शिक्षा मिल सके। सरकारी स्‍कूलों में सुविधाओं में सुधार होगा तो टीचर्स बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे। निजी स्‍कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर है और उनके रिजल्‍ट भी बेहतर हैं।

सरकारी क्षेत्र के प्राइमरी स्‍कूलों की सुविधाओं में इजाफा करने की जरूरत है। जब एक शिक्षक अपने स्‍तर पर संसाधन जुटाकर स्‍कूल को सुंदर बनाने और बच्‍चों को खेल में बेहतरीन प्‍लेटफार्म देने में कामयाब हो सकता है, तो यदि सरकार अगर इस पर ध्‍यान दे तो जमीनी स्‍तर से प्रतिभाएं आगे आ सकती हैं। उच्‍च शिक्षा को सस्‍ता बनाया जाना चाहिए।

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हायर एजुकेशन के लिए नीतियां बनाने में भागीदार हैं डॉ. अरोड़ा
डॉ. मुकेश अरोड़ा एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज में हिंदी विभाग के विभागाध्‍यक्ष हैं। 1987 में गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वुमन में बतौर हिंदी प्राध्‍यापक अपना करियर शुरू किया। 24 साल से पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट मेंबर हैं और छह बार सिंडिकेट मेंबर रह चुके हैं। सीनेट मेंबर रहते हुए हायर एजुकेशन के लिए बनने वाली नीतियों में वह अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

पिछले 20 सालों में पंजाब यूनिवर्सिटी की कोई भी ऐसी पॉलिसी नहीं होगी, जिसमें डॉ. मुकेश अरोड़ा की सहभागिता न हो। एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज में रिसर्च सेंटर की स्‍थापना करवाने में उनका अहम योगदान रहा है। हिंदी के राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के सम्‍मेलनों में हिस्‍सा लेकर वह हिंदी को सम्मान दिला चुके हैं।

सहज स्‍वभाव होने की वजह से कॉलेज में वह पूरे सूबे में पहचान रखते हैं। यूनिवर्सिटी स्‍तर पर विद्यार्थियों की हर तरह की समस्‍या का समाधान करने में वह मदद करते रहे हैं। साहित्‍य से संबंधित कई संस्‍थाओं से जुड़कर और साहित्‍य सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। इसके अलावा कई विद्यार्थियों को शोध करवा चुके हैं।

शिक्षा में मूलभूत सुविधाओं में सुधार की जरूरत
डॉ. मुकेश अरोड़ा बताते हैं कि शहर में निजी स्‍कूलों और कॉलेजों ने खूब तरक्‍की की है। सरकारी स्‍कूल और कॉलेजों में मूलभूत सुविधाओं में निसंदेह सुधार हुआ है लेकिन यह नाकाफी है। उनका कहना है कि अगर शिक्षा प्रणाली को मजबूत करना है तो इसके लिए सरकारी प्राइमरी स्‍कूलों को मजबूत करना होगा। प्राइमरी स्‍तर पर ही बच्‍चों के भविष्‍य की नींव रखी जाती है।

सरकारी स्‍कूलों में पढ़ने वाले बच्‍चों के अभिभावक ज्‍यादा जागरूक नहीं हैं। इसलिए उन बच्‍चों के भविष्‍य निर्माण की पूरी जिम्‍मेदारी टीचर्स पर आ जाती है। उन बच्‍चों के लिए भी अगर स्‍कूल में पढ़ाई का अच्‍छा माहौल मिले तो वह भी अच्‍छी शिक्षा हासिल कर सकते हैं।

उच्च शिक्षा के बराबर अवसर दिए जाने चाहिए
उन्होंने कहा कि कॉलेज स्‍तर पर लुधियाना में और सरकारी कॉलेज खोले जाने के साथ साथ सीटें बढ़ाई जानी चाहिए। सरकारी कालेजों की कमी भी कहीं न कहीं शिक्षा के रास्ते में रोड़ा बन रही है। डॉ. अरोड़ा के अनुसार लड़कों के लिए शहर में उच्‍च शिक्षण संस्‍थान जरूर खोले जाने चाहिए ताकि लड़कियों और लड़कों को उच्‍च शिक्षा के बराबर अवसर मिल सकें।

स्‍कूल कॉलेजों में रेगुलर भर्ती न होने से नाराज हैं डॉ. अरोड़ा
डॉ. मुकेश अरोड़ा के अनुसार स्‍कूल और कॉलेज स्‍तर पर इस समय टीचर्स की नियुक्ति कॉन्ट्रैक्ट पर की जा रही है। इसमें युवाओं को वेतन बहुत कम दिया जा रहा है। उच्‍च शिक्षा लेने के बाद भी अगर युवाओं को अच्‍छी सैलरी न मिले तो वह इस क्षेत्र में काम करने को तैयार नहीं होंगे। शहर के स्‍कूलों और कॉलेजों में बहुत से पद खाली हैं, लेकिन युवाओं को रेगुलर बेस पर नौकरी नहीं दी जा रही है, जिसका नुकसान शिक्षा जगत को झेलना पड़ रहा है।

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By Nandlal Sharma