देश की अग्रणी रेडिमेड गारमेंट एवं टी-शर्ट निर्माता कंपनी ड्यूक फैशन्स इंडिया लिमिटेड पंजाब की आर्थिक राजधानी लुधियाना के जालंधर बाईपास स्थित शहर के एंट्री प्वाइंट की सुंदरता को चार चांद लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। बाईपास चौक से गुजर रहे जीटी रोड पर बने फ्लाईओवर के नीचे पिल्लर्स एवं दीवारों पर पहले ग्रेफिटी के जरिए रंग भरे। बाईपास के चौराहों को सुंदर बनाया और अब बस स्टैंड के पास के इलाके को भी नया लुक दिया जा रहा है। ड्यूक यह काम अपनी कारपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत कर रहा है।

काबिलेजिक्र है कि कुछ साल पहले देश में सीएसआर को लेकर गाइड लाइन्स आईं और इंडस्ट्री का भी माइंड सेट बदला। नतीजतन देश में करीब 16 से लेकर 18 हजार कंपनियां सीएसआर के तहत तकरीबन 12 से 14 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रही हैं। ज्यादातर पैसा शिक्षा और सेहत पर खर्च हो रहा है। इसका फायदा निश्चित तौर पर उक्त क्षेत्रों में देखा जा सकता है। साफ है कि सीएसआर के जरिए समाज में बदलाव आ रहा है।

ड्यूक फैशन्स के चेयरमैन कोमल कुमार जैन का कहना है कि सीएसआर में कंपनी अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रही हैं। इसके तहत कंपनी परिसर के नजदीक स्थित जालंधर बाईपास चौक को सुंदर बनाने और इसके रखरखाव का जिम्मा लिया गया। पहले चरण में फ्लाईओवर पर ग्रेफिटी करवाई गई और सारा कचरा इत्यादि हटवा कर इसे सुंदर बनाया गया। ग्रेफिटी के जरिए लोगों को समाज कल्याण एवं पर्यावरण संभाल का संदेश दिया गया। इसके साथ ही बाईपास चौक को सुंदर बनाया गया। इसके लिए चौक से मलबा हटवा कर खाद डालने के बाद प्लांटेशन कराई गई। साथ ही वेलकम बोर्ड लगवाए गए। फिलहाल बाईपास चौक पर बस स्टैंड के आसपास के इलाके को भी सुंदर बनाने का काम शुरू किया जा रहा है। इस इलाके में भी पूरी योजना के साथ प्लांटेशन कराई जाएगी। इसके लिए ड्यूक की टीम मंथन कर रही है। 

 

इसके अलावा हैबोवाल खुर्द स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहे तमाम बच्चों को स्वेटर्स इत्यादि वितरित किए गए। कंपनी ने सिविल लाइन्स स्थित विजयानंद डायग्नोस्टिक सेंटर में मेडिकल उपकरण खरीदने में भी सहयोग किया है। कोमल जैन का तर्क है कि सीएसआर के तहत कंपनी सालाना करीब चालीस लाख रुपये का खर्च कर रही है। ड्यूक फैशन्स सीएसआर के तहत अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए वचनबद्ध है। यदि कोई भी संगठन सीएसआर के तहत कोई प्रोजेक्ट देता है तो उस पर मंथन के बाद ही कंपनी खर्च कर फैसला लेती है। 

 

By Krishan Kumar