इसरो के चेयरमैन व मशहूर वैज्ञानिक सतीश चंद्र धवन, मशहूर शायर साहिर लुधियानवी, पूर्व डीजीपी केपीएस गिल व केंद्रीय खेल मंत्री एमएस गिल जैसी शख्सियतों के इस शहर ने उद्योग जगत में तरक्की करने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। इस जिंदादिल शहर ने बड़ी संख्या में टापर स्टूडेंट्स दिए हैं।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पंजाब हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल के रिजल्ट में पिछले दो दशकों से लुधियाना के स्टूडेंट्स ही पंजाब में टाप करते आ रहे हैं। इसी तरह सीबीएसई के परिणामों में भी शहर के विद्यार्थियों ने अपना परचम लहराया। पंजाब में आतंकवाद का दौर समाप्त होने के बाद इस शहर ने अन्य सेक्टर के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में अहम उपलब्धियां हासिल की।

पीएयू और गडवासू ने देशभर में छाप छोड़ी

देश में हरित क्रांति में मुख्य भूमिका अदा करने वाली पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) जहां आज भी देश की श्रेष्ठ एग्र्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में शूमार है, वहीं पीएयू परिसर में ही पशुपालन उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए वर्ष 2006 में गुरु अंगद देव वेटनरी एंड एनिमल साइंसेज (गडवासू) यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई। मात्र 12 सालों में पूरे देश में अपना अलग स्थान बनाने में कामयाब रही। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में दोनों यूनिवर्सिटी पंजाब ही नहीं, देश को कई विख्यात वैज्ञानिक प्रदान कर चुकी हैं। 

 

नेशनल और इंटरनेशनल स्कूलों के आने से शहर बना शिक्षा का हब

पिछले दो दशक में लुधियाना ने शिक्षा के क्षेत्र में शहर ने बहुत तरक्की की। सरकारी क्षेत्र हो या फिर निजी क्षेत्र दोनों में इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी सुधार हुआ। शहर में नेशनल और इंटरनेशनल स्कूलों की चेन वाले प्रतिष्ठित स्कूलों ने इस शहर की ओर रुख किया और इसे शिक्षा का हब बना दिया।

प्रतिष्ठित और विख्यात सीबीएसई स्कूल खुले, जिसमें मानव रचना इंटरनेशनल, डॉन बास्को, माउंट जी लिटरा, डीपीएस, डीसीएम प्रेसीडेंसी, जीडी गोयनका, डीएवी, रायन इंटरनेशनल, बाल भारती, सतपाल मित्तल व अन्य बड़े ग्रुप लुधियाना में आए।

इन स्कूलों के आने से शहर के अन्य निजी स्कूलों ने भी अपने संस्थान में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया और स्कूल की कई शाखाएं खोल संस्थान का विस्तार किया। बदलते समय के साथ प्रोफेशनल कालेजों ने भी इस शहर का रुख किया और बड़ी संख्या में बड़े कालेज खुले।

सरकारी स्कूल भी पीछे नहीं

शहर में एक मेरिटोरियस स्कूल खोला गया जिसमें 500 बच्चों के रहने के लिए होस्टल भी बनाया गया। इसी तरह एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज में नया होस्टल बनाया गया। शहर में पांच सरकारी हाई स्कूलों को सीनियर सेकंडरी स्कूलों में अपग्रेड किया गया।

सरकारी स्कूलों के बच्चे जमीन पर बैठते थे अब ज्यादातर सरकारी स्कूलों में बेंच हैं। सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम शुरू किए गए। सरकारी स्कूलों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगाई गई। टीचर्स के खाली पदों को भरा गया। शहर के पांच सीनियर सेकंडरी स्कूल में मुख्यमंत्री कोष से नई इमारतें बनी।

एक हजार से ज्यादा निजी स्कूल

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने शहर के एक हजार के करीब निजी स्कूलों को मान्यता दी। इस सब के बीच स्लम में बच्चों के लिए स्कूलों की व्यवस्था नहीं हो पाई। कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं ही स्लम एरिया में शिक्षा देने का कार्य कर रही हैं। इन सबके बीच सरकारी प्राइमरी स्कूल कूचा नंबर 16 फील्डगंज के विद्यार्थी आज भी खुले आसमान के नीचे पढऩे को मजबूर हैं। इसके अलावा शहर के छात्रों को साइंस में पोस्ट ग्रैजुएशन के लिए अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। हालांकि गवर्नमेंट कालेज फार गर्ल्स में छात्राओं के लिए यह सुविधा उपलब्ध है।

By Nandlal Sharma