लुधियाना, जेएनएन। महानगर का जगराओं रेल पुल का निर्माण कार्य रेलवे और कांट्रेक्टर की ढीली कारगुजारी के कारण इतिहास में सुविधा के लिए कम और असुविधा के लिए अधिक जाना जाएगा। ऐसा लगता है कि रेलवे अधिकारी इस निर्माण के लिए गंभीर नहीं हैं। शायद इसीलिए वे निर्माण कंपनी पर डंडा नहीं चला सके, बस डेडलाइन पे डेडलाइन ही बढ़ाते जा रहे हैं। अब एक बार फिर से इसके कार्य में लेटलतीफी हो गई है। पहले मार्च के अंत तक तैयार कर इसे अप्रैल के पहले सप्ताह में खोलने की बात कही गई, पर अब कार्य धीमा होने से इसे मई में ट्रैफिक के लिए खोलने की बात कही गई है।

दरअसल, नए साल के आगमन से पहले जब पुल का ढांचा लोहे के पिलरों पर रखा गया तब रेलवे की ओर से कहा गया कि एक जनवरी को जगराओं पुल का निर्माण पूरा करके नगर निगम को सौंप दिया जाएगा। उसके बाद इसे पूरा करने की जिम्मेदारी निगम की होगी। रेलवे की ओर से बकायदा इस पुल का निर्माण पूरा होने के बारे में लिखते हुए एक पत्र निगम को भेजा गया। इसके बाद ही मेयर बलकार सिंह संधू नगर निगम कमिश्नर केपी बराड़ के साथ जब वीरवार को मौके पर जायजा लेने पहुंचे तो उन्हें पुल का कार्य अधूरा ही मिला।

रेलवे अधिकारियों पर भड़के मेयर

निगम टीम ने देखा कि पुल की दोनों साइड अभी शटरिंग हटाने का काम लंबित है। इस पर वह रेलवे अधिकारियों पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि अब तो 16 दिन ऊपर हो गए हैं और एक बार फिर से रेलवे के असिस्टेंट इंजीनियर गुरदीप सिंह ने उन्हें वही रटा रटाया जवाब दिया कि रेलवे को अपने हिस्से का काम पूरा करने के लिए कम से कम सात दिन अभी और लगेंगे। इस पर मेयर ने भी दो टूक कह दिया, अब जुबानी काम नहीं चलेगा, इसके लिए लिखित में पत्राचार होगा और हर हाल में समय में पुल का निर्माण पूरा करके देना होगा।

रेलवे को पत्र जारी कर तय समय में पुल सौंपने को कहा

वहीं वापस निगम कार्यालय पहुंचते ही मेयर बलकार संधू ने रेलवे को पत्र संख्या 849 जारी करवा दिया। इसमें रेलवे अधिकारियों को लिखा गया कि पुल निर्माण में पहले ही देर हो चुकी है। रेलवे को तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करके नगर निगम को पुल सौंपना होगा ताकि इसे जल्द ट्रैफिक के लिए खोला जा सके। साथ ही कहा है कि भविष्य में पुल संबंधी सभी पत्र सीधे निगम कमिश्नर को ही भेजे जाएं।

मेयर बोले, रेलवे के लेट करने से निगम को भी लगेगा समय

मेयर बलकार सिंह संधू ने कहा कि जगराओं पुल के निर्माण कार्य में पहले से ही कांट्रेक्टर कंपनी और रेलवे ने ढीली कारगुजारी दिखाई है। पहले एक जनवरी को निगम के सुपुर्द इस पुल को सौंपने की बात कही गई थी। अब रेलवे पहले से ही 15 दिन से अधिक लेट है और एक सप्ताह और काम के लिए मांगा गया है। चूंकि रेलवे ने वादे के अनुसार निगम को पुल एक जनवरी को नहीं सौंपा, ऐसे में एक महीने की देरी का असर आगे के काम पर भी पड़ेगा। मेयर का कहना है कि निगम को अपने हिस्से का काम करने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। इस कारण अब पुल को जनता को मई में ही समर्पित किया जाएगा।

 

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