जेएनएन, लुधियाना : महामंडलेश्वर ब्रह्मार्षि कुमार स्वामी ने ऑनलाइन साप्ताहिक प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि आज जो समय चल रहा है वह स्वार्थ से भरपूर है। आज का युग प्रतिस्पर्धा वाला युग है। कोई भी व्यक्ति अपनी स्वार्थ सिद्धि के एवज में किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुंचाने में तनिक भी हिचकता नहीं है। बस आगे आने की होड़ में मतिभ्रम हो गई है। हर व्यक्ति चाहता है कि मेरा मकान सबसे ऊंचा व बड़ा हो, मेरी कार सबसे महंगी व सुंदर हो। हर व्यक्ति चाहता है कि उसका परिवार सुख-सुविधाओं से पूर्ण हो। इस प्रयास में वह इतना अंधा हो जाता है कि इंसानियत के नियम कायदों को भी ताक पर रख देता है।

कई बार ऐसी घटनाएं भी सुनने व देखने को मिलती है। हैरानी होती है कि अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए कोई किस कदर गिर सकता है। साथ ही यह भी देखने में आता है कि जिस सीढ़ी का प्रयोग करके ऊपर चढ़ते है, उसे भी भूल जाते है। केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति करना ही आज के आधुनिक कहे जाने वाले मनुष्य को एक मात्र उद्देश्य रह गया है।

मनुष्य में कृतघ्नता के भाव स्वाभाविक रूप से व्याप्त है। साथ में यह भी कहना चाहूंगा कि येन-केन प्रकारण कोई भी उपलब्धि प्राप्त तो की जा सकती है, लेकिन मन की शांति नहीं। मन में पश्चाताप की भावना हमेशा बनी रहती है कि मैने फलां व्यक्ति के साथ धोखा किया है, उसकी टांग खींची है। अपना भला करने के लिए दूसरे का किया नुकसान हमेशा याद आता रहता है. कोई न कहे लेकिन मनुष्य की अंतरात्मा अवश्य ही धिक्कारती रहती है, इससे मनुष्य तनावग्रस्त हो जाता है और सुख-सुविधाओं में रहते हुए भी उनके फल को अनुभव नहीं कर पाता है। एक कसक हमेशा बनी रहती है बुरे कर्मो की टीस कभी समाप्त नहीं होती, इसलिए अच्छे कर्म करने चाहिए।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!