धमेंद्र सचदेवा, समराला (लुधियाना)। गांव चेहलां का मुर्गा शेरू जब कान में सोने की बाली पहन कर इठलाता-इतराता घूमता है तो उसे देख हर कोई हैरान रह जाता है। यह मुर्गा है अजब शौक रखने वाले आजाद सिंह का। आजाद कैंची और चाकू तीखा करने का काम करके अपने परिवार के गुजरा करता है। तंगी के बावजूद उसे अपने मुर्गे से इतना प्यार है कि उसे सोने की बाली पहनाई है। वह शेरू को रोजाना सुबह करीब 4 बजे बाली बांघ देता है और फिर मुर्गा गांव में घूमने लगता है। सैर करने वाले लोग भी उसके कान में सोने की बाली देख हैरत में पड़ जाते हैं।

कहते हैं कि शौक का कोई मूल्य नहीं होता। आजाद सिंह को अपने मुर्गे को सुंदर दिखाने का जुनून देखने लायक है। आजाद और पैसे कमा कर मुर्गे को दूसरे कान में भी सोने की बाली पहनाने की तैयारी में हैं। वर्तमान में उनके मुर्गे की कीमत करीब 2 हजार रुपये है जबकि उसके कान की बाली ही दस हजार रुपये की है। आजाद सिंह के पिता और परिवार के अन्य लोग छोटे-मोटे कामों में उपयोग होने वाले औजार बनाते हैं और इनको बेच कर ही अपना गुजर बसर करते हैं।  इस कालोनी के लोग छोटे आौजार जैसे कैंची तीखी करना, चाकू तीखा करना इत्यादि काम कर अपना पेट पालते हैं।

राजस्थान से लेकर आया मुर्गा

आजाद का परिवार गांव चेहलां की कालोनी में रहता है। पिता जोगा सिंह का कहना है कि उसके परिवार के पास सोना नहीं है, लेकिन उसके बेटे के शौक के आगे नतमस्तक होकर पूरा सहयोग दिया है। आजाद ने बताया कि वह काम के सिलसिले में राजस्थान गया था, वहां मुर्गा पसंद आ गया। आजाद मानते हैं कि इस मुर्गे की बात की कुछ अलग है। मुर्गा पसंद आने पर वह उसे अपने गांव ले आया और उसे पाल लिया। अब इस कालोनी में मुर्गा घूमता रहता है, शाम को मुर्गा घूम कर अपने घर चला जाता है व उनके कमरे में ही सोता है। सुबह शेरू की कुकड़ूकुड़ू की आवाज के साथ कालोनी के लोग उठते हैं।

आजाद सिंह का कहना है कि अब वह मुर्गे के दूसरे कान में भी जल्द सोने की बाली पहनाएगा। जब तक शेरू की जिंदगी है, तब तक उसका परिवार व कालोनी वाले उसकी सेवा करते रहेंगे। समराला के सुरिंदरपाल सिंह ने कहा कि सुबह जब वह समराला से चेहलां तक सैर करने जाते है तो यह मुर्गा अक्सर कालोनी में घूमता दिख जाता है। उन्हें यह देखकर हैरत होती है कि उसके कान में सोने की बाली डाली गई है। उन्होंने ऐसा शौक पहले कहीं नहीं देखा।

Edited By: Pankaj Dwivedi