संस, लुधियाना : हर कोई व्यक्ति विकास पुरुष नहीं बन सकता है। विकास पुरुष वही बन सकता है। जो अपने जीवन में विसर्जन का सूत्र अपना लेता है। विसर्जन करने वाला हमेशा ही आगे जाकर विकास पुरुष के व्यक्तित्व के रूप में उभरकर सामने आता है। ऐसे ही विकास पुरुष के रूप में उभर कर सामने आए थे आचार्य तुलसी। उन्होंने अपने जीवन में विकास के अनेकों कार्य संपादित किए थे। नारी शक्ति युवक शक्ति समाज शक्ति राष्ट्र शक्ति बालक शक्ति को जागृत करने के लिए अथक प्रयास किया था। जिसका परिणाम है कि आज तेरापंथ धर्म संघ में विकास की गंगा है वह प्रवाहित होती हुई नजर आती है। आचार्य तुलसी जैसे व्यक्तित्व यदा-कदा ही इस धरा पर अवतरित होते है। ये विचार तुलसी कल्याण केंद्र के प्रांगण में आयोजित विकास महोत्सव को संबोधित करते हुए मुनि भूपेंद्र कुमार ने व्यक्त किए।

कार्यक्रम का संचालन तेरापंथ सभा के मंत्री मनोज धारीवाल ने किया। मधुर गायक संजय बरडिया ने अपनी गीत की विशेष रूप से प्रस्तुति प्रस्तुत की। इस दौरान पंजाब प्रांतीय ज्ञानशाला की संयोजिका ने अपने विचारों को प्रस्तुत करते हुए कहा आचार्य तुलसी नारी शक्ति को जागृत करने वाले आचार्य थे आज हम नारी शक्ति का जो विकास देख रही है उसमें आचार्य तुलसी की सबसे बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका थी। तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष धीरे धीरज सेठिया ने कहा कि आचार्य तुलसी युवा शक्ति के प्रतीक पुरुष के रूप में उभर कर हमारे सामने आए थे। उन्होंने युवा शक्ति को जागृत करके इस संसार के अंदर शक्ति का एहसास कराने में सबसे बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

इस दौरान तेरापंथ महिला मंडल के सदस्यों के गीत के माध्यम से आचार्य तुलसी का व्याख्यान किया। इस अवसर पर तेरापंथ सभा अध्यक्ष कमल नवलखा, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष इंदु देवी सेठिया, मंजू देवी, कविता के माध्यम और अनेकों वक्ताओं ने आज के दिवस पर अपने विचारों की अभिव्यक्ति प्रस्तुत की।

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