जासं, लुधियाना : केंद्र और राज्य सरकार अलग-अलग योजनाओं के तहत सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए फंडिंग कर रही है। शहर के ज्यादातर सरकारी प्राइमरी स्कूलों में क्लास रूम बनवा दिए गए, लेकिन सफाई व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर ही नहीं है। हालात यह हैं सरकारी प्राइमरी स्कूलों की सफाई व्यवस्था सीधे-सीधे विद्यार्थियों के जिम्मे है। राज्य बाल अधिकार सुरक्षा आयोग के चेयरमैन भी इस पर चिंता जता चुके हैं लेकिन इसके बावजूद सरकारी प्राइमरी स्कूलों में सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं करवाई गई। निगम चुनाव की घोषणा से पूर्व लुधियाना में तो सरकारी प्राइमरी स्कूलों की सफाई व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा बन गया था। क्योंकि एक नेता की तरफ से बच्चों से सफाई करवाने व कूड़ा फेंकने का वीडियो वायरल हो गया था और उसके बाद विभाग ने एक टीचर को सस्पेंड कर दिया था और एक का तबादला कर दिया था। उसके बाद प्रदेश भर के अध्यापक संगठन लुधियाना पहुंच गए थे। इस मामले की सुनवाई करने के बाद बाल अधिकार सुरक्षा आयोग के चेयरमैन सुकेश कालिया ने सेक्रेटरी एजुकेशन व जिला शिक्षा अधिकारी को हिदायतें दी थी कि सरकारी प्राइमरी स्कूलों में सफाई के इंतजाम करवाए जाएं। कालिया ने जिला शिक्षा अधिकारी लुधियाना को यहां तक लिखा था कि वह नगर निगम के अफसरों से बात करें ताकि शहरी क्षेत्र के स्कूलों में सफाई करवा सकें, लेकिन फिर भी अफसरों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।

सियासी दल भी नहीं देते इस तरफ ध्यान

सरकारी प्राइमरी स्कूलों में सियासी दलों के नेता भी ध्यान नहीं देते, जिसका खामियाजा नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है। सफाई सेवक न होने की वजह से सरकारी स्कूलों के कैंपस में कूड़े के ढेर लगे रहते हैं।

कोट्स

सरकारी स्कूलों में बच्चों से सफाई करवाने का एक मामला मेरे संज्ञान में आया था। तहकीकात की तो पता चला कि सरकारी प्राइमरी स्कूलों में सफाई सेवक की व्यवस्था ही नहीं है। उसके बाद सेक्रेटरी एजुकेशन व जिला शिक्षा अधिकारी को यह व्यवस्था करवाने को कहा। निगम क्षेत्र में तो कर्मचारी आसानी से सफाई कर सकते हैं। इसके लिए निगम के पार्षदों को आगे आना होगा।

सुकेश कालिया, चेयरमैन, पंजाब राज्य बाल अधिकार सुरक्षा आयोग

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