जासं, खन्ना : दिल्ली पब्लिक स्कूल खन्ना में प्राथमिक शिक्षा के महत्व को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें डीपीएस सोसायटी की तरफ से विशेषज्ञ डॉ. शारदा मनोचा ज्वाइंट डायरेक्टर एचआरडीसी और डॉ. रेणु गुलाटी एसोसिएट प्रोफेसर होम इक्नॉमिक्स संस्था, दिल्ली यूनिवर्सिटी विशेष रूप से पहुंचे। डीपीएस चंडीगढ़, डीपीएस मोहाली और डीपीएस पटियाला के अध्यापकों ने भी भाग लिया।

सेमिनार के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रारंभिक शिक्षा विद्यार्थी के विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इसलिए डीपीएस सोसायटी हर साल अपने 244 संस्थानों के प्री-प्राइमरी अध्यापकों के लिए इस सेमिनार का आयोजन करती है। इस दौरान उन विधियों पर चर्चा की गई जिससे बच्चों का बहुपक्षीय विकास हो सके।

डॉ. रेणु गुलाटी ने कहा कि 6 साल तक की आयु में बच्चे का 90 प्रतिशत विकास हो जाता है। ये समय बच्चे के बहुपक्षीय विकास के लिए आवश्यक होता है। इस समय दौरान बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बहुत ते•ा गति से होता है और बच्चे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करना सीखते हैं। उन्होंने ये सुझाव भी दिया कि इस समय के दौरान माता-पिता और अध्यापकों को बच्चों से किसी भी प्रकार तुलना व प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस प्रकार करने से बच्चे की भावनाओं को ठेस पहुंचती है और उनके व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ता है।

डॉ. शारदा मनोचा ने कहा कि पढ़ाने-सिखाने की प्रक्रिया के दौरान दो या दो से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने ये भी सुझाव दिया कि इस आयु के बच्चों पर करसिव राइटिग का भी बोझ पड़ रहा है। इस बात का ध्यान रखते हुए प्राथमिक शिक्षा में प्रिट फोटो (अक्षरों की बनावट) के रूप में ही लिखना सिखाना चाहिए।

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