मुनीश शर्मा, लुधियाना। पंजाब से निर्यात को लेकर इन दिनों भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण भाड़े में भारी बढ़ोतरी होना है। बात अफ्रीका की करें, तो एक साल में भाड़ा चार गुणा, अमेरिका के लिए पांच गुणा, यूरोप के लिए दस गुना तक हो गया है। भाड़े में बढ़ोतरी का सिलसिला एक साल से जारी है। केंद्र सरकार की ओर से भाड़ा कम करने के लिए शीघ्र कंटेनर की संख्या में बढ़ोतरी कर उपलब्धता को बढ़ाने की बात कही जा रही है। सरकार ने बाकायदा आनलाइन पोर्टल भी बनाया है ताकि शार्टेज के दौरान कंटेनरों की उपलब्धता को आनलाइन देखा जा सके।

इसके बावजूद दाम में किसी तरह का अंतर नहीं आ रहा। इससे निर्यातकों की इनपुट कास्ट में खासी बढ़ोतरी हो गई है। पंजाब में सबसे अधिक निर्यात साइकिल, मशीन टूल, हैंड टूल, ट्रैक्टर पार्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स का रहता है। इस समय सबसे ज्यादा दिक्कत अफ्रीका के लिए आ रही है। यहां के लिए कंटेनर की शार्टेज है।

ओएनएस लाजिस्टिक के अनिल वर्मा के मुताबिक इस समय कंटोनरों की भाड़े में काफी बढ़ोतरी हो गई। हालात यह हैं कि कंटेनरों के लिए लंबी वेटिंग है। इस समय पंजाब में अफ्रीका, अमेरिका और यूरोप को लेकर अच्छी डिमांड है और यहां एक्सपोर्ट के लिए अच्छे आर्डर होने के बावजूद कंटेनरों की शार्टेज बड़ी चुनौती पैदा कर रहे हैं। इसके साथ ही आर्डर की डिलीवरी का समय भी बढ़ा हुआ है।

पैरामाउंट इंपेक्स के एमडी राकेश कपूर के मुताबिक इस समय कंटेनर के दाम आसमान छू रहें हैं। इसके चलते इंडस्ट्री को एक्सपोर्ट करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कंटेनर के दामों में लगातार इजाफा होने से पंजाब के उद्योगों को पोर्ट से दूरी के चलते अधिक भाड़ा देना पड़ रहा है, इससे इनपुट कास्ट में भारी बढ़ोतरी हो गई है। अंकल फूड्स के एमडी हितेश डंग के मुताबिक इस समय विदेशी मार्केट से अच्छे आर्डर प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन कंटेनर के बढ़े दामों में सप्लाई कर पाना मुमकिन नहीं है। जिन दाम पर पहले डील हो चुकी है, उसमें अब फ्रेट कास्ट दो से तीन गुना तक हो चुकी है। इससे निर्यात करना बेहद मुश्किल है।

मंत्रालय को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग

चैंबर आफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग (सीआइसीयू) के प्रधान उपकार सिंह आहुजा ने कहा कि कंटेनर की शार्टेज के साथ-साथ पंजाब से पोर्ट की दूरी को देखते हुए फ्रेट सब्सिडी मिलनी बेहद जरूरी है। पहले तो कच्चा माल लाने और फिर बंदरगाह तक मैटीरियल भेजने के लिए भाड़े के रुप में भारी खर्च किया जाता है। इसलिए केंद्र सरकार को एक पत्र लिखकर कंटेनर के दामों को नियंत्रण में लाने के साथ-साथ पंजाब के उद्योगों को फ्रेट सब्सिडी देने की मांग की जाएगी।

Edited By: Pankaj Dwivedi