सचिन आनंद, खन्ना

केंद्र सरकार पर महंगाई बढ़ाने के आरोप लगाकर भारत बंद का आह्वान करने वाले कांग्रेसी नेताओं ने सोमवार को खन्ना के बाजारों को बंद कराने के लिए पूरी ताकत लगा दी, लेकिन खुद अपने व्यापार चालू रखे। इससे कांग्रेसी नेताओं द्वारा अपने और जनता के लिए अलग-अलग नीतियों अपनाने की बात सामने आ गई। बंद के बावजूद अपना कारोबार जारी रखने वालों में यूथ कांग्रेस के प्रधान और दो पार्षदों जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कांग्रेसी नेता शामिल हैं।

सोमवार को सुबह की गई पड़ताल में कांग्रेसी नेताओं की पोल खुलकर सामने आ गई। खन्ना यूथ कांग्रेस के प्रधान और ब्लाक समिति से उम्मीदवार सतनाम ¨सह सोनी शराब के ठेकेदार हैं। उनका समाधी रोड स्थित शराब का ठेका तय समय पर खुला। सोनी जिस इनोवा कार में सफर करते हैं, वह भी इसके बाहर खड़ी रही। उधर, सोनी कांग्रेस के धरने और रोष मार्च में शामिल थे। इसी तरह कांग्रेस के सीनियर पार्षद शाम लाल मल्होत्रा भी दुकानों को बंद करना रहे, लेकिन उनके दो बेटों की धोबियां वाली गली में दुकानें खुली हुई थीं। बाजार के कुछ लोगों ने मार्च के दौरान यह सवाल भी मल्होत्रा से पूछा, लेकिन मल्होत्रा इसका जवाब दिए बगैर आगे निकल गए। कांग्रेस की महिला नेताओं ने ये दुकानें जाकर बंद कराई।

इसी तरह वार्ड 12 से कांग्रेस के युवा पार्षद गुरमीत नागपाल के भाई की अमलोह रोड स्थित दुकान भी 12 बजे खुल गई। जबकि, पौने बारह बजे तक नागपाल के दोनों भाई उनकी अनुपस्थिति में धरने और दुकानें बंद कराने में व्यस्त थे। इससे बंद को सफल बनाने के लिए कांग्रेस की गंभीरता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों में भी पार्टी की इस दोहरी नीति के चलते साख गिरी ही है। केवल मल्होत्रा ने आरोप नकारे

इस संबंध में शाम लाल मल्होत्रा, सतनाम ¨सह सोनी और गुरमीत नागपाल से संपर्क साधने की कोशिश की गई तो केवल मल्होत्रा ने फोन उठाया। उन्होंने कहा कि बंद सफल था, केवल कुछ भाजपा के दुकानदारों ने दुकानें खुली रखी। अपने बेटों की दुकानें खुली होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दुकानें केवल कौंसिल प्रधान को चाय पिलाने के लिए खोली थी। सतनाम ¨सह सोनी ने फोन नहीं उठाया और गुरमीत नागपाल ने फोन काट दिया। विधायक की गैर मौजूदगी भी चर्चा में

इतने बड़े आयोजन में खन्ना के विधायक गुरकीरत ¨सह कोटली की गैर मौजूदगी चर्चा का विषय रही। हालांकि, खन्ना नगर कौंसिल के प्रधान विकास मेहता और ब्लाक कांग्रेस प्रधान ज¨तदर पाठक ने नेतृत्व की कमान संभाले रखी, लेकिन कोटली की कमी खलती रही। मेहता ने कहा कि विधायक हिमाचल प्रदेश के सह इंचार्ज हैं, उन्हें जरूरी काम से वहां जाना पड़ा। इसलिए वे नहीं आ पाए। उधर, वर्करों में चर्चा रही कि ऐसे आयोजनों में विधायक की गैर मौजूदगी का नुकसान हो सकता है।

Posted By: Jagran